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सुप्रीम कोर्ट: यूनिटेक के चंद्रा बंधुओं से मिलीभगत में तिहाड़ जेल अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश

Wed, 06 Oct 2021 07:56 PM IST
Amit Mandal राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 06 Oct 2021 07:56 PM IST
सार

इसी साल अगस्त में यूनिटेक के पूर्व निदेशकों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में आश्चर्यजनक खुलासा किया था कि तिहाड़ जेल में एक गुप्त भूमिगत ऑफिस खोला गया है। 

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SC directs full-fledged probe into collusion of Tihar Jail officials with jailed ex-Unitech promoters Sanjay and Ajay Chandra
Sanjay Chandra - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तिहाड़ जेल के उन अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने और आपराधिक जांच का निर्देश दिया है जिन्होंने यूनिटेक के पूर्व प्रमोटरों संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को जेल में रहने के दौरान अनुचित सहायता प्रदान की थी। दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया।

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने आदेश दिया कि इस कार्यवाही के लंबित रहने तक तिहाड़ जेल के ये अधिकारी निलंबित रहेंगे। दरअसल, दिल्ली पुलिस आयुक्त अस्थाना ने अपनी 28 सितंबर की रिपोर्ट में उल्लेखित व्यक्ति के साथ-साथ उन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी आपराधिक जांच की अनुमति मांगी थी जिनका उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया है। पीठ को यह भी बताया गया कि इन जेल अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। 
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साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रबंधन को मजबूत करने और उपाय करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से सुझाव मांगे हैं। मंत्रालय को चार हफ्ते में दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट पर सुझाव देने के लिए कहा गया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने यूनिटेक कंपनी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद चंद्रा बंधुओं को तिहाड़ से मुंबई की तलोजा जेल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट में कुछ जेल अधिकारियों की मिलीभगत से चंद्रा बंधुओं द्वारा कई गैरकानूनी गतिविधियों को शामिल होने की बात सामने आई थी। गत 26 अगस्त को पीठ ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को को ईडी की रिपोर्ट के आधार पर तिहाड़ जेल स्टाफ के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया था। 
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पहली बार जस्टिस चंद्रचूड सुनवाई के दौरान हुए गुस्सा 
बुधवार को सुनवाई के दौरान चंद्रा बंधुओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने पीठ से उन्हें फोरेंसिक ऑडियोर ग्रांट थॉर्नटन रिपोर्ट तक पहुंच प्रदान करने का आग्रह किया ताकि आरोपी अपना बचाव कर सकें। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि वह एकतरफा तरीके से आगे न बढ़े।

सिंह ने कहा, मैं नहीं चाहता कि आप (अदालत) को बाद में पछताना पड़े कि आपने समय पर कार्रवाई नहीं की। मुझे यकीन है कि अदालत के पास चंद्राओं के खिलाफ कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है। मुझे ग्रांट थॉर्नटन रिपोर्ट दी जानी चाहिए थी। मुझे यह दिखाने का अवसर मिलना चाहिए कि फंड को डाइवर्ट नहीं किया गया है। ट्रायल में यदि यह पाया जाता है कि फंड डाइवर्ट नहीं हुए तो क्या पुरानी चीजें वापस आ सकती हैं। क्या समय को पीछे घुमाया जा सकता है। क्या ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट मुझे अभी नहीं दी जानी चाहिए।

साथ ही सिंह ने कहा कि कोर्ट कंपनियों को चला रही है। उन्होंने कहा कि आखिर कितनी कंपनियां चलाएगी यह अदालत? आम्रपाली आप चला रहे हैं, यूनिटेक आप चला रहे हैं, सुपरटेक आप चला रहे हैं। कम से कम मुझे ग्रांट थॉर्नटन रिपोर्ट का बचाव करने दें।

सिंह की दलीलों से नाराज न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सिंह को शीर्ष अदालत के खिलाफ 'आरोप' नहीं लगाने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह किस तरह की भाषा है? यह क्या है कि बाद में पछतावा होगा। जस्टिस चंद्रचूड बोल रहे थे लेकिन सिंह उनकी बात को नजरअंदाज करते हुए अपनी बातें रख रहे थे। इस पर शांत और धैर्यवान माने जाने वाले जस्टिस चंद्रचूड बेहद नाराज हुए। उन्होंने कहा, मेरी बात सुनिए, मेरी बात सुनिए। क्या यह अदालत को संबोधित करने का तरीका है?


अदालत ने कहा, हम पर आरोप मत लगाइए 
पीठ के दूसरे सदस्य जस्टिस शाह ने कहा कि आरोपियों को गिरफ्तार करने की ठोस वजह है। उन्होंने सिंह से कहा, मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। जस्टिस शाह ने कहा, ऐसी बातें मत कहिए और इस अदालत के खिलाफ आरोप न लगाइए। इसके बाद पीठ ने ग्रैंड थॉर्नटन रिपोर्ट की एक प्रति देने की सिंह के अनुरोध को ठुकरा दिया। पीठ ने कहा कि दायर की गई स्थिति रिपोर्ट से यह सामने आता है कि फॉरेंसिक ऑडिटर्स की रिपोर्ट ईडी द्वारा जांच का विषय है। जांच जारी है और कानून के मुताबिक केस डायरी नहीं दी ज सकती। 

मालूम हो कि वर्ष 2017 में यूनिटेक के पूर्व प्रवर्तक संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को घर खरीदारों को ठगने और धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 

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