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Supreme Court: आंध्र प्रदेश में मुस्लिम आरक्षण मसले पर संविधान पीठ गठित, छह सितंबर को सुनवाई

Tue, 30 Aug 2022 11:50 AM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Tue, 30 Aug 2022 11:50 AM IST
सार

सीजेआई यूयू ललित ने बताया, इन दोनों मामलों को 6 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा और 13 सितंबर से इन मामलों में अंतिम सुनवाई शुरू होगी। 

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SC Constitution bench take up Andhra Pradesh government decision of reservations for Muslim population
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण गरीबों (ईडब्ल्यूएस) के लिए नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण की सांविधानिक वैधता पर 13 सितंबर से सुनवाई करेगी। पीठ आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) के आरक्षण की सांविधानिक वैधता भी परखेगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस एस रवींद्र भट, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी व जस्टिस जेबी पारदीवाला की पांच सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को इन मामलों को छह सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया। उस दिन सुनवाई पूरी करने के लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी।
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पीठ पहले 103वें संशोधन अधिनियम, 2019 की वैधता से संबंधित मामला सुनेगी। इसमें आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ मुस्लिमों को आरक्षण देने संबंधित राज्य सरकार के कानून को पहले ही खारिज कर चुकी है। उसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
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दस्तावेज की करेंगे जांच, चार नोडल वकील नियुक्त
पीठ ने चार वकीलों शादान फरासत, नचिकेता जोशी, महफूज नाजकी और कनू अग्रवाल को नोडल वकील नियुक्त किया। नोडल वकीलों को यह देखना है कि दोनों मामलों में क्या सामान्य दस्तावेज, वैधानिक दस्तावेज, केस लॉ और अन्य सामग्री दाखिल किए गए हैं।
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2005 की दीवानी अपील है मुस्लिम आरक्षण मामला
मुस्लिम एसईबीसी आरक्षण से संबंधित मामला 2005 की दीवानी अपील है। इसमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या मुसलमानों को एक समुदाय के रूप में, संविधान के अनुच्छेद- 15 और 16 के तहत सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा घोषित किया जा सकता है? पीठ इन मामलों पर विचार करने पर सहमत हुई क्योंकि ये मुद्दे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

गुजरात दंगों की याचिकाओं पर कार्यवाही बंद, बीस साल से लंबित थीं 11 याचिकाएं, नौ में से एक मामले में ट्रायल लंबित
सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगों से जुड़ी सभी 11 याचिकाओं के समूह का मंगलवार को एक साथ निपटारा कर दिया। ये पिछले 20 साल से लंबित थीं। इनमें गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों के मद्देनजर शीर्ष अदालत से दखल की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में बाद में हुई घटनाओं को देखते हुए अब ये याचिकाएं निष्फल हो गई हैं। इन याचिकाओं पर विचार कर विशेष जांच दल का गठन किया था। इसने दंगों के दौरान दर्ज नौ मामलों की जांच की थी। वहीं, एसआईटी के वकील मुकुल रोहतगी ने पीठ को बताया कि केवल नरोदा गांव से जुड़े एक मामले का ट्रायल अभी लंबित है और वह अंतिम बहस के चरण में है। अन्य मामले हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील के चरण में हैं।


विवादित ढांचा ध्वंस मामला : यूपी सरकार के खिलाफ अवमानना मामले भी बंद
सुप्रीम कोर्ट ने 1992 के अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराने से जुड़े अवमानना के मामले बंद कर दिए हैं। ये उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य के खिलाफ चल रहे थे। शीर्ष अदालत ने अपने ही 2019 के फैसले का संदर्भ देते हुए मंगलवार को कहा कि यह मामला अब औचित्यहीन हो गया है। पीठ ने कहा, इस मामले में बड़ी पीठ ने 2019 में फैसला दे दिया है और याचिकाकर्ता असलम भूरे की भी मौत हो चुकी है।
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