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सुप्रीम कोर्ट: मुख्य न्यायाधीश ने कृष्णा जल विवाद की सुनवाई से खुद को किया अलग, जानें क्या है पूरा मामला
Wed, 04 Aug 2021 12:45 PM IST
प्रशांत कुमार
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Wed, 04 Aug 2021 12:45 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच कृष्णा जल विवाद की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
चीफ जस्टिस एन वी रमण ने बुधवार को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच कृष्णा जल विवाद की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। चीफ जस्टिस ने यह निर्णय तब लिया जब दोनों राज्यों ने कहा कि मध्यस्थता संभव नहीं है और वे कानूनी तरीके से इसका निपटारा चाहते हैं। चीफ जस्टिस एनवी रमण ने सोमवार को हुई पिछली सुनवाई में इस मामले में मध्यस्थता की वकालत करते हुए कहा था कि वह कानूनी मुद्दों पर मामले की सुनवाई नहीं कर सकते , लेकिन वह दोनों राज्यों के बीच मध्यस्थता कराने की व्यवस्था कर सकते हैं। चीफ जस्टिस रमण ने दोनों राज्यों के वकील को अपनी सरकारों से निर्देश लेने के लिए कहा था।
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दोनों राज्यों के वकीलों ने बुधवार को बताया कि मध्यस्थता संभव नहीं है इसलिए कानूनी तरीके से इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। जिसके बारे चीफ जस्टिस ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। अब सुप्रीम कोर्ट की दूसरी पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस मूलतः अविभाजित आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने कहा था, 'मैं दोनों राज्यों से हूं। मुझे कानूनी मुद्दों को सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन अगर दोनों राज्य मध्यस्थता के लिए सहमत होते हैं तो वह मदद कर सकते हैं।'
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तेलंगाना पर पानी रोकने का आरोप
चीफ जस्टिस रमण की अध्यक्षता वाली पीठ आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा तेलंगाना के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि तेलंगाना उन्हें पीने और सिंचाई के उद्देश्यों के लिए कृष्णा नदी के पानी के उनके वैध हिस्से से वंचित कर रहा है।
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याचिका में मुख्य रूप से मांग की गई है कि तेलंगाना सरकार को 2014 के अधिनियम के अनुसार अधिकार क्षेत्र को अधिसूचित करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही 28 जून, 2021 कोतेलंगाना सरकार द्वारा पारित आदेश को निरस्त किया जाए। इसके अलावा आंध्र प्रदेश सरकार ने कई अन्य मांगें भी है।