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उपग्रह ने बताया कहां हैं आतंकी ठिकाने, चीन के पास भी नहीं ऐसी तकनीक

Mon, 03 Oct 2016 02:13 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 03 Oct 2016 02:13 PM IST
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Satellite found out terrorist camps, Even China doesn't have this technique
- फोटो : demo

उड़ी आतंकी हमला मामले में पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत की ओर से किए गए सर्जिकल अटैक में महज तीन महीने पहले प्रक्षेपित किए गए कारटोसैट 2 सीरिज के उपग्रह ने अहम भूमिका निभाई। इसी उपग्रह ने एलओसी के समक्ष आतंकियों के ठिकानों की सेना को सटीक जानकारी उपलब्ध कराई। इतना ही नहीं ऑपरेशन के दौरान भी इस उपग्रह की लगातार सेवा ली गई।

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गौरतलब है कि 22 जून को प्रक्षेपित कारटोसैट 2 सीरिज यह उपग्रह जमीन से 500 किलोमीटर ऊपर से न सिर्फ साफ तस्वीरें खींच सकता है, बल्कि प्रति सेकेंड 37 किलोमीटर की तेज रफ्तार के बावजूद अपने निश्चित लक्ष्य का एक मिनट का वीडियो भी बना सकता है। पाकिस्तान तो अंतरिक्ष क्षेत्र में कहीं है ही नहीं, उससे सहानुभति रखने वाले चीन के पास भी इतना उन्नत उपग्रह नहीं है। सर्जिकल अटैक मामले में कारटोसैट 1, रिसोर्ससैट 2 की भी मदद ली गई।
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अतिविशिष्ट सूत्र के मुताबिक उड़ी आतंकी हमला मामले में पाकिस्तान को कड़ा सबक बनाने की जब रणनीति बन रही थी, तब सेना ने इस मामले में इसरो की मदद मांगी। इसके बाद इसरो की टीम इस मिशन में जुट गई। 28 और 29 सितंबर की रात सर्जिकल अटैक से पहले इसरो की ओर से सेना को एलओसी पार स्थित आधा दर्जन से अधिक आतंकी ठिकानों की जानकारी दी। फिर ऑपरेशन के दौरान भी लगातार इसरो की टीम सक्रिय रही। सर्जिकल अटैल के प्रमाण के रूप में सरकार निकट भविष्य में इसरो की मदद से ली गई तस्वीर को सामने ला सकती है।

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पाक का सबकुछ उपग्रह की जद में

Satellite found out terrorist camps, Even China doesn't have this technique
नवाज शरीफ - फोटो : file photo

कारटोसैट 2 श्रृंखला का उपग्रह इतना शक्तिशाली है कि पाकिस्तान ही नहीं कई अन्य देशों की पल-पल की गतिविधि को सामने ला सकता है। जहां तक पाकिस्तान का सवाल है तो यह उपग्रह वहां के प्रमुख नेताओं के आवास की आसपास की गतिविधियों, टैंक सहित अन्य सैन्य साजोसामान की मौजूदगी का सही लोकेशन पलक झपकते बता सकता है।

चूंकि कारटोसैट 2 के अलावा कारटोसैट 1, रिसोर्ससैट 2 सीरिज के उपग्रह बादल छाए रहने के दौरान भी फोटो खींचने में सक्षम है। कारटोसैट 2 सीरिज के उपग्रह तो इस दौरान वीडियो बनाने में भी सक्षम है। ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच युद्घ की नौबत आई तब भी ये उपग्रह भारतीय सेना की महत्वपूर्ण ताकत साबित होंगे।

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