सरफेसी कानून में संशोधन के लिए विधेयक लोकसभा में पेश
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बैंकों के फंसे कर्ज -एनपीए- की वसूली सुनिश्चित करने तथा कारोबारियों की सहूलियत के लिए सरकार ने सोमवार को लोकसभा में वित्तीय अस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन -सरफेसी- कानून 2002 में संशोधन का विधेयक पेश किया।
इससे न सिर्फ ऋण वसूली की प्रक्रिया में तेजी आएगी बल्कि ऋण वसूली न्यायाधिकरण -डीआरटी- में फंसे मामलों के तेजी से निबटाने में भी मदद मिलेगी। यही नहीं, इससे देश के सभी डीआरटी ऑनलाइन हो जाएंगे, जिससे देश-विदेश, कहीं भी बैठे व्यक्ति ऑनलाइन ही अपना पक्ष प्रस्तूत कर सकेंगे।
इससे कारोबार करना भी आसान होगा। सरफेसी कानून क्या है
सरफेसी कानून बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को यह अधिकार देता है कि फंसे कर्जों की वसूली के लिए रेहन रखी गई आवासीय या कारोबारी संपत्ति को नीलाम कर सकें। देश की पहली एसेट रिकंस्ट्रक्शसन कंपनी आरसिल का गठन इसी कानून के तहत हुआ है जो कि इस तरह की संपत्ति की नीलामी करती है। संशोधन क्या है
बैंकों का क्या फायदा
सरफेसी कानून के तहत कार्रवाई शुरू करने की वजह से देश भर में करीब 70000 मामले डीआरटी में चले गए हैं। इनमें पांच लाख करोड़ रुपये से भी अधिक की संपत्ति फंसी हुई है।
कानून में संशोधन होने से इन विवादों को तेजी से निबटाया जा सकेगा। यही नहीं, सभी डीआरटी ऑनलाइन हो जाएंगे, जिससे वादी-प्रतिवादी ऑनलाइन ही अपनी बात डीआरटी के समक्ष पेश कर सकेंगे।
अभी तक डीआरटी में जो मामले जाते है, उनमें से करीब 10 फीसदी में ही वसूली हो पाती है। बैंकों का क्या फायदा इससे बैंकों को काफी फायदा होगा।
क्योंकि सरफेसी कानून के तहत वह जैसे ही आवासीय या कारोबारी परिसंपत्ति पर कब्जा लेते हैं और उसे नीलाम करने की कोशिश करते हैं तो अगला पक्ष डीआरटी चला जाता है।
डीआरटी में देरी होने की वजह से बैंकों का पैसा फंसा रहता है। इसलिए अभी तक पांच लाख करोड़ रुपये इसमें फंस गए हैं।
कारोबारी का क्या फायदा किसी परिसंपत्ति की नीलामी का मामला जब डीआरटी में जाता है तो कारेेबारी को भी दिक्कत होती है। सरफेसी कानून में प्रस्तवित संशोधन से मामला तेजी से निस्तारित होगा, जिससे कारोबार करना आसान हो सकेगा।