Sanjeev Jeeva: आखिर कौन दे रहा नेपाल से सुपारी किलिंग का फरमान? मिर्जा के बाद ऐसे बढ़ा असंगठित अपराध का धंधा
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विस्तार
लखनऊ कोर्ट में जीवा की हत्या के बाद पकड़े गए आरोपी ने जिस तरीके से नेपाल का जिक्र किया है, उससे एक बार फिर से चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि क्या नेपाल एक बार फिर से अंडरवर्ल्ड का 'सेफ हाउस' या सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है। इस सेफ हाउस से अपने देश के माफियाओं और अंडरवर्ल्ड से नाता रखने वाले लोगों को मदद की जा रही है। सवाल उठ रहा है कि अगर जीवा की हत्या के लिए नेपाल से पकड़े गए आरोपी को रुपये और असलहे दिए गए, तो क्या नेपाल में ऐसी गतिविधियां फिर से जोर पकड़ने लगी हैं। फिलहाल पकड़े गए आरोपी के कुबूलनामे के साथ जांच एजेंसियों समेत खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। जरायम की दुनिया को करीब से समझने वाले लोगों का मानना है कि नेपाल पिछले कुछ वक्त से अंडरवर्ल्ड के बड़े-बड़े माफियाओं के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। इसके पीछे का तर्क यही है कि कभी नेपाल के ताकतवर माफिया और नेता मिर्जा दिलशाद बेग की हत्या के बाद असंगठित अपराध की कमान स्थानीय और छोटे-छोटे माफियाओं में बंटती रही।
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सीमावर्ती राज्यों में होती है अवैध तस्करी
जीवा की हत्या में पकड़े गए आरोपी से हुई पड़ताल के बाद पता चला कि उसे नेपाल में किसकी, कब, कहां और क्यों हत्या करनी है इसकी पूरी जानकारी दी गई। जानकारी के मुताबिक आरोपित ने कबूल किया कि उसको रुपये और असलहा भी नेपाल से ही दिया गया। इस पूरे मामले पर नजर रखने वाले और जरायम की दुनिया को करीब से समझने वालों का कहना है कि बीते कुछ समय में नेपाल में असंगठित अपराध और गिरोह का दायरा बढ़ा है। इसमें पाकिस्तान और अन्य देशों के अपराधियों की एंट्री भी हुई है। 1990 से लेकर सन 2000 के बीच में अपराधियों पर नकेल कसने वाले एक रिटायर्ड वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं कि नेपाल में जो असंगठित गिरोह पनप रहा है उसके पीछे की मंशा भारत में खास तौर से सीमा पर लगते हुए इलाकों में माहौल बिगाड़ने की ही है। सीमा से लगते हुए जिलों और देश के अलग-अलग राज्यों के माफियाओं को अवैध असलहों से लेकर अवैध करेंसी और अपराधियों के प्रशिक्षण तक की व्यवस्था की जा रही है। वह कहते हैं कि जीवा हत्या कांड में पकड़े गए आरोपी ने नेपाल में रुपये और असलहे मिलने की बात का पता चला है। उससे इशारा तो यही मिल रहा है कि नेपाल की जमीन से कैसे अस्थिरता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।
नेपाल की जमीन को सुरक्षित जगह मानते हैं माफिया
जरायम की दुनिया को करीब से समझने वाले असीम भट्ट कहते हैं कि पिछले कुछ समय में नेपाल सीमा पर या अंदर हुई गतिविधियों को बारीकी से अध्ययन करें, तो पता चलता है कि किस तरह भारत के अपराधियों समेत दुनिया के अलग-अलग मुल्कों के अपराधियों के लिए नेपाल मुफीद जगह बन रही है। वह कहते हैं कि पिछले महीने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास नेपाली पासपोर्ट था, लेकिन उसे नेपाली भाषा नहीं आती थी। वह सीमा पार करके भारत में एंट्री करना चाह रहा था। इसी तरह पिछले साल पश्चिम बंगाल के बड़े हथियार तस्कर शुब्रत को गिरफ्तार किया गया। बाद में जब जेल से छूटा तो सीधा नेपाल भाग गया। हालांकि भारत की पुलिस के दबाव में उसको नेपाल में गिरफ्तार किया गया। सुब्रत के पास नेपाली पासपोर्ट बरामद हुआ। असीम कहते हैं यह दो मामले ही नहीं बल्कि और भी कई मामलों में नेपाल की जमीन को स्थानीय माफिया ज्यादा सुरक्षित और 'सेफ हाउस' मानते आए हैं।
मिर्जा दिलशाद बेग की हत्या के बाद बदल गया क्राइम सीन
वरिष्ठ पत्रकार और अंडरवर्ल्ड को करीब से समझने वाले मनीष मिश्रा कहते हैं कि नेपाल में 1990 के दौर में संगठित रूप से चल रहा है अपराधियों का गिरोह मिर्जा दिलशाद बेग की हत्या के बाद बिखर गया। वह कहते हैं जब तक मिर्जा दिलशाद बेग जीवित था तब भी उसके पाकिस्तान से लेकर डी कंपनी तक से रिश्ते जग जाहिर थे। मनीष मिश्रा के मुताबिक उत्तर प्रदेश और बिहार के सभी माफिया और डॉन मिर्जा दिलशाद बेग के साथ मिलकर नेपाल से सीमावर्ती राज्यों में अपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते थे। लेकिन मिर्जा बेग के हत्या के बाद नेपाल में फैला आपराधिक संगठित गिरोह बिखर कर छोटे-छोटे टुकड़ों में पनपने लगा। ऐसे दौर में पाकिस्तान से लेकर खाड़ी देशों और दुनिया के दूसरे मुल्कों के बड़े अपराधियों के लिए एक बड़ी पनाहगाह के तौर पर नेपाल की जमीन इस्तेमाल किए जाने की चर्चाएं होने लगीं।
पाकिस्तान के लिए नेपाल के रास्ते भारत में अस्थिरता बढ़ाना ज्यादा आसान
वरिष्ठ पत्रकार मनीष मिश्रा कहते हैं कि इसके पीछे पाकिस्तान की बहुत बड़ी साजिश है। क्योंकि पाकिस्तान भारत और नेपाल के खुले बॉर्डर और सेना न होने का फायदा उठाते हुए भारत में अस्थिरता फैलाने के सभी प्रयास और काम करता है। अपराध जगत को करीब से जानने वाले सूत्रों का कहना है कि नेपाल से असलहों की तस्करी से लेकर अवैध करेंसी का आदान-प्रदान आसानी से होता है। कई बार दोनों देशों की पुलिस ने ऐसे मामलों में धरपकड़ भी की है। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान नेपाल बॉर्डर से भारत के अंदर माहौल खराब करने के लिए न सिर्फ स्थानीय लोगों का इस्तेमाल करता है, बल्कि अपने कुछ गुर्गे भी नेपाल में बिठा रखे हैं, जो स्थानीय लोगों के साथ मिलकर भारत में स्थिरता बढ़ाने के लिए सभी प्रयास करते रहते हैं।
दुनिया के कई अपराधी तलाश रहे नेपाल में जगह
फिलहाल जीवा की हत्या के आरोपी के कुबूलनामे की बात सामने आने के साथ ही खुफिया एजेंसियों से लेकर जांच करने वाली एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। कुछ समय में जिस तरह की जानकारियां नेपाल से मिली हैं, उससे इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि नेपाल में मिलीभगत से पासपोर्ट बनवा कर देश में प्रवेश करना और भारत में माहौल खराब करने के लिए कैसे दुश्मन देश नेपाल की जमीन का इस्तेमाल करते हैं। खुफिया विभाग से जुड़े रहे एक रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं कि पाकिस्तान समेत यूरोप और अमेरिका के बड़े अपराधी भी नेपाल में सिर छुपाने के लिए आ जाते हैं। वह कहते हैं कि अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में उस अपराधी को पकड़ा गया, जो अमेरिका के ड्रग डीलर का एजेंट होता था। उसकी गिरफ्तारी तब हुई जब वह नेपाल से सीधा अमेरिका पहुंचा।