{"_id":"651b5f85c4baf0e53c02c666","slug":"sangh-sarkaryavah-hosabale-said-right-time-to-write-true-history-of-india-2023-10-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"RSS: संघ सरकार्यवाह होसबाले बोले- भारत का सही इतिहास लिखने का समय आ गया, बौद्धिक आजादी की ओर बढ़ रहा देश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
RSS: संघ सरकार्यवाह होसबाले बोले- भारत का सही इतिहास लिखने का समय आ गया, बौद्धिक आजादी की ओर बढ़ रहा देश
Tue, 03 Oct 2023 05:55 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: जलज मिश्रा
Updated Tue, 03 Oct 2023 05:55 AM IST
सार
वह अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के ‘अखिल भारतीय शिक्षक सम्मान समारोह’ में शिक्षकों और प्रोफेसरों की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब अंधेरा छंटता है तो विरोधी ताकतें शोर जरूर मचाती हैं क्योंकि वे सूर्य को देखना नहीं चाहती हैं।
विज्ञापन
Dattatreya Hosabale
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने सोमवार को कहा कि एक वक्त था जब देश के बारे में बोलने को नफरत की दृष्टि से देखा जाता था लेकिन वह औपनिवेशिक मानसिकता अब खत्म हो चुकी है और भारत बौद्धिक स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश का सही इतिहास लिखने का समय आ गया है।
वह अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के ‘अखिल भारतीय शिक्षक सम्मान समारोह’ में शिक्षकों और प्रोफेसरों की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब अंधेरा छंटता है तो विरोधी ताकतें शोर जरूर मचाती हैं क्योंकि वे सूर्य को देखना नहीं चाहती हैं। हम वे लोग हैं जो प्रकाश से प्यार करते हैं और प्रकाश लाने में विश्वास करते हैं। समाज को विरोधी तत्वों से न तो डरना है और न ही झुकना है बस सावधानी जरूर बरतनी है। भारत के स्व को जगाने का शुभ समय आ गया है। इसलिए भारत का सही इतिहास सामने लाना होगा।
विज्ञापन
देश में देश के बारे में बोलना ही घृणा हो गई।
उन्होंने कहा कि एक अतिथि ने अयोध्या पर एक किताब लिखने के दौरान कठिनाइयों का सामना करने के अपने अनुभव को साझा किया। यह केवल एक कहानी नहीं है। ऐसे कई उदाहरण हैं। देश के सही इतिहास के संदर्भ में, राष्ट्र के संदर्भ में, राष्ट्र की संस्कृति के संदर्भ में, पीएचडी के लिए प्रोफेसर अनुमति नहीं देते थे। एक समय ऐसा रहा कि इस देश में देश के बारे में बोलना ही घृणा हो गई। इस देश में राष्ट्र के बारे में बोलना बुद्धिमानी नहीं मानी जाती थी लेकिन परिस्थिति हमेशा ऐसी नहीं रहती, देश का स्व जागृत हुआ है। उन्होंने कहा कि देश अब करवट ले रहा है। आज दुनिया के सामने देश को फिर से विश्व गुरु स्थापित करवाने के प्रयास जारी हैं। भारत के समाज के अंदर आज भी वह क्षमता है।
विज्ञापन
वह अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के ‘अखिल भारतीय शिक्षक सम्मान समारोह’ में शिक्षकों और प्रोफेसरों की एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब अंधेरा छंटता है तो विरोधी ताकतें शोर जरूर मचाती हैं क्योंकि वे सूर्य को देखना नहीं चाहती हैं। हम वे लोग हैं जो प्रकाश से प्यार करते हैं और प्रकाश लाने में विश्वास करते हैं। समाज को विरोधी तत्वों से न तो डरना है और न ही झुकना है बस सावधानी जरूर बरतनी है। भारत के स्व को जगाने का शुभ समय आ गया है। इसलिए भारत का सही इतिहास सामने लाना होगा।
विज्ञापन
#WATCH एक जमाना ऐसा रहा कि इस देश में देश के बारे में बोलना ही घृणा हो गई...लेकिन परिस्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती। दशकों तक जो उपनिवेशिकता की मानसिकता चली, वह अब समाप्त होकर हम बौद्धिक स्वतंत्रता की तरफ जा रहे हैं: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जनरल सेक्रेटरी दत्तात्रेय होसबले,… pic.twitter.com/X4jcf7bz9A
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 2, 2023
विज्ञापन
देश में देश के बारे में बोलना ही घृणा हो गई।
उन्होंने कहा कि एक अतिथि ने अयोध्या पर एक किताब लिखने के दौरान कठिनाइयों का सामना करने के अपने अनुभव को साझा किया। यह केवल एक कहानी नहीं है। ऐसे कई उदाहरण हैं। देश के सही इतिहास के संदर्भ में, राष्ट्र के संदर्भ में, राष्ट्र की संस्कृति के संदर्भ में, पीएचडी के लिए प्रोफेसर अनुमति नहीं देते थे। एक समय ऐसा रहा कि इस देश में देश के बारे में बोलना ही घृणा हो गई। इस देश में राष्ट्र के बारे में बोलना बुद्धिमानी नहीं मानी जाती थी लेकिन परिस्थिति हमेशा ऐसी नहीं रहती, देश का स्व जागृत हुआ है। उन्होंने कहा कि देश अब करवट ले रहा है। आज दुनिया के सामने देश को फिर से विश्व गुरु स्थापित करवाने के प्रयास जारी हैं। भारत के समाज के अंदर आज भी वह क्षमता है।