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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भरी ‘अखंड भारत’ की हुंकार, कहा- भारत से अलग हुआ पाकिस्तान संकट में जी रहा है
Fri, 26 Feb 2021 03:15 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, हैदराबाद
एजेंसी, हैदराबाद
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 26 Feb 2021 03:15 AM IST
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत
- फोटो : ANI
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को ‘अखंड भारत’ की जरूरत की हुंकार भरी। सरसंघचालक भागवत ने कहा, भारत से अलग हुए पाकिस्तान जैसे देश अब संकट में जी रहे हैं।
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उन्होंने एक किताब के विमोचन के मौके पर कहा, ‘हिंदू धर्म’ के जरिये अखंड भारत (अविभाजित भारत) संभव है, लेकिन ऐसा जबरन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, दुनिया के कल्याण के लिए गौरवशाली अखंड भारत के निर्माण की जरूरत है, इसलिए देशभक्ति की भावना को जगाए जाने की आवश्यकता है।
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उन्होंने आगे कहा, छोटे किए गए भारत को (फिर से) एकजुट किए जाने की आवश्यकता है। मौजूदा भारत से भी ज्यादा, इससे अलग होकर अब खुद को इसका हिस्सा नहीं बताने वालों (पाकिस्तान) को अपने ‘दुखों’ से बाहर आने के लिए इसकी जरूरत ज्यादा है।
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भागवत ने पाकिस्तान को बताया विभाजन के बाद से ही संकट का शिकार
अखंड भारत की अवधारणा के संभव होने पर जोर देते हुए भागवत ने कहा, कुछ लोग 1947 में देश के विभाजन से पहले इस बात पर गंभीर संदेह जताते थे कि पाकिस्तान का गठन होगा, लेकिन ऐसा हो गया। यदि आप इस देश के बंटवारे से छह महीने पहले किसी से पूछते, तो कोई भी इसका अंदाजा नहीं लगा सकता था।
लोगों ने पंडित जवाहरलाल नेहरू से पूछा था कि पाकिस्तान के गठन संबंधी नई बात सामने आ रही है। सरसंघचालक ने कहा, जवाब में उन्होंने कहा था कि यह (बंटवारा) मूर्खों का सपना है।
भागवत ने कहा कि ब्रिटिश शासन काल में लॉर्ड वावेल ने भी अपने देश की संसद में कहा था कि भारत को भगवान ने बनाया है। ऐसे में इसे कौन विभाजित कर सकता है। लेकिन आखिरकार बंटवारा हुआ। जो असंभव प्रतीत होता था, वह हुआ। इसलिए अभी असंभव लगने वाले अखंड भारत की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसकी आवश्यकता है।
भागवत ने कहा कि स्वयं को अब भारत का हिस्सा नहीं कहने वाले इससे अलग हुए क्षेत्रों के लिए ‘भारत’ के साथ फिर से जुड़ना अधिक जरूरी है। उन्होंने कहा, इन देशों ने जो कर सकते थे, वह सब किया। लेकिन उन्हें कोई समाधान नहीं मिला। उनके संकटों का एक मात्र समाधान भारत के साथ फिर से जुड़ना है और इससे उनकी सभी समस्याएं सुलझ जाएंगी। उन्होंने सवाल करते हुए कहा, गांधार अफगानिस्तान बन गया। क्या वहां तब से शांति है? पाकिस्तान का गठन हुआ। क्या वहां उस समय से शांति है?
दबाने की नहीं जोड़ने की बात कर रहे हम
भागवत ने कहा, हम उन्हें (पाकिस्तान और बांग्लादेश को) दबाने की नहीं, अपने साथ जोड़ने की बात कर रहे हैं। जब हम अखंड भारत की बात करते हैं, तो हमारा इरादा ताकत के बल पर यह हासिल करना नहीं है, बल्कि सनातन धर्म के जरिए उन्हें जोड़ना है।
सनातन धर्म मानवता और पूरी दुनिया का धर्म है और इसे आज हिंदू धर्म कहा जाता है। भागवत ने कहा कि भारत में कई चुनौतियों से निपटने की क्षमता है और दुनिया मुश्किलों से पार पाने के लिए उसकी ओर देखती है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम के जरिए दुनिया फिर से खुशहाली और शांति हासिल कर सकती है।