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संदेशखाली: राजनीतिक ताकत और प्रशासन का गठजोड़, न्याय मांगने पर मिलती है गांव से निकालने की धमकी

Sun, 18 Feb 2024 04:16 PM IST
N Arjun एन अर्जुन
Updated Sun, 18 Feb 2024 04:16 PM IST
सार

किसानों के मुताबिक शेख शाहजहां ने अकेले पूरे संदेशखाली विधानसभा क्षेत्र में 8 से 10 हजार बीघा जमीन पर अवैद्य कब्जा कर रखा है। कहते हैं, अगर इन तीनों की बात करें तो लगभग 12 से 15 हजार वीघा जमीन पर कब्जा किया हुआ है।

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sandeshkhali how shahjahan sheikh became powerful in west bengal politics with police alliance
जानकारी देते किसान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

'हमारे पूर्वजों सौ वर्षों से भी अधिक समय से यहां पर रह रहे हैं। लेकिन ऐसा अत्याचार और ऐसी घिनौनी राजनीति हमने कभी नहीं देखा। हम आदिवासी हैं। हम आज अपनी ही जमीन में मजदूर बन गए। खाने के लाले पड़ गए हैं। क्या हमको कभी न्याय मिलेगा।' आसमान की ओर हाथ जोड़ते रो पड़ते हैं, संदेशखाली नतून पाड़ा के बुजुर्ग बहादुर। कहते हैं, राजनीतिक रसूख, पुलिस और प्रशासन की गठजोड़ ने हमको भीख मांगने पर मजबूर कर दिया। कहीं कोई सुनवाई नहीं है। 
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12-15 हजार बीघा जमीन पर टीएमसी नेताओं का कब्जा
बहादुर बताते हैं कि 'हमारे ही गांव की करीब 225 बीघा जमीन पर इन्होंने लीज के नाम पर कब्जा कर लिया। जब पैसा मांगों तो लाठी-डंडों से पिटे गए।' न्याय मांगों तो गांव से बाहर निकालने की धमकी मिलती है।' किसानों के मुताबिक शेख शाहजहां ने अकेले पूरे संदेशखाली विधानसभा क्षेत्र में 8 से 10 हजार बीघा जमीन पर अवैद्य कब्जा कर रखा है। कहते हैं, अगर इन तीनों की बात करें तो लगभग 12 से 15 हजार वीघा जमीन पर कब्जा किया हुआ है।संदेशखाली के किसान सुकांत कहते हैं, यहां पर किसान की कोई सुनावाई नहीं। ऊपर से लेकर नीचे तक तृणमूल कांग्रेस का बोलबाला है। सांसद तृणमूल का, विधायक तृणमूल का, ब्लॉक अध्यक्ष तृणमूल का। 
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'कृषि भूमि छीनकर तालाब बना लिए'
किसानों का आरोप है कि कृषि योग्य भूमि छीन कर तालाब बना लिए। राजनीतिक ताकत, रसूख का तांडव और घमंड देखिए, कहते जहां जाना है जाओ। ज्यादा कुछ किया तो गांव से निकाल बाहर भेज देंगे। उनकी राजनीतिक पहुंच है। आरोप है कि पूरे क्षेत्र में कोई दूसरा मछली का व्यापार नहीं कर सकता, अगर कोई करता भी है तो उसे शेख शाहजहां की शरण में जाना ही होगा। किसानों ने दावा किया कि इस तरह ये तीनों दिनों दिन अरबपति और खरबपति बनते गए और आदिवासी, छोटे और मझले किसान दिन-ब-दिन मजदूरी और मजदूर बनने पर विवश होते गए। उल्लेखनीय है कि इस मामले के दो आरोपी उत्तम सरदार और शिबू हाजरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
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'यहां पुलिस या प्रशासन का मतलब शेख शाहजहां'
'हम आदिवासी हैं। हमारी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। परेशान होकर हमने आंदोलन का रास्ता अपनाया।' संदेशखाली सात नंबर नतून पाड़ा के किसान हरिपद सरदार कहते हैं, 'यहां पुलिस या फिर प्रशासन कुछ नहीं सुनती। यहां का सब कुछ है शेख शाहजहां। वह जो बोलेगा वही होगा। जब भी हम पुलिस और प्रशासन के पास जाते, वे हमें शेख शाहजहां, उत्तम सरदार और शिबू हाजरा के पास जाने की सलाह देते।'
 
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