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Constitution day: उपराष्ट्रपति धनखड़ बोले- संसद कार्यपालिका व न्यायपालिका के हस्तक्षेप के लिए उत्तरदायी नहीं
Sun, 26 Nov 2023 06:59 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Sun, 26 Nov 2023 06:59 AM IST
सार
भारत के संविधान की प्रस्तावना को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसे अमेरिका के संविधान से प्रभावित माना जाता है। भारत के संविधान की प्रस्तावना यह कहती है कि संविधान की शक्ति सीधे तौर पर जनता में निहित है। भारत का संविधान देश का सर्वोच्च कानून है।
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Vice President Jagdeep Dhankhar
विस्तार
राजधानी दिल्ली में रविवार को संविधान दिवस के मौके पर विज्ञान भवन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। यहां बोलते हुए उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र की आत्मा है। इसकी सर्वोच्चता कार्यपालिका या न्यायपालिका के किसी भी हस्तक्षेप के लिए उत्तरदायी नहीं है। बता दें कि 1949 में इसी दिन भारत की जनता ने संविधान अपनाया था।
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संविधान दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संसद की संप्रभुता राष्ट्र की संप्रभुता का पर्याय है और यह अभेद्य है। संसद के विशेष कार्यक्षेत्र में कोई भी घुसपैठ सांवैधानिक उल्लंघन और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल होगी। उन्होंने कहा, संसद लोकतंत्र की आत्मा है और इसकी सर्वोच्चता में कार्यपालिका या न्यायपालिका का कोई दखल संभव नहीं है।
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उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश के निरंतर विकास के लिए, कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका को सहयोगात्मक संवाद करना चाहिए, न कि टकराव अपनाएं। बिना नाम लिए उन्होंने सरकार के आलोचकों पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि जब भी देश में कुछ बड़ा होता है, तो कुछ लोग इसकी संस्थाओं को कलंकित करने और उन्हें नीचा दिखाने के कृत्य में लग जाते हैं। उपराष्ट्रपति ने 1975 में लगाए गए आपातकाल को स्वतंत्र भारत के इतिहास 'काला युग' करार दिया।
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क्या होता है संविधान, क्या है अहमियत
सामान्य तौर पर, संविधान को नियमों और उपनियमों का एक ऐसा लिखित दस्तावेज कहा जाता है, जिसके आधार पर किसी देश की सरकार काम करती है। यह देश की राजनीतिक व्यवस्था का बुनियादी ढांचा निर्धारित करता है। हर देश का संविधान उस देश के आदर्शों, उद्देश्यों और मूल्यों का संचित प्रतिबिंब होता है। संविधान महज एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह समय के साथ लगातार विकसित होता रहता है।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना
भारत के संविधान की प्रस्तावना को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसे अमेरिका के संविधान से प्रभावित माना जाता है। भारत के संविधान की प्रस्तावना यह कहती है कि संविधान की शक्ति सीधे तौर पर जनता में निहित है। भारत का संविधान देश का सर्वोच्च कानून है। यह सरकार के मौलिक राजनीतिक सिद्धांतों, प्रक्रियाओं, प्रथाओं, अधिकारों, शक्तियों और कर्त्तव्यों का निर्धारण करता है।
दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है जो तत्त्वों और मूल भावना के नजरिए से अद्वितीय है। मूल रूप से भारतीय संविधान में कुल 395 अनुच्छेद (22 भागों में विभाजित) और आठ अनुसूचियां थीं, लेकिन विभिन्न संशोधनों के परिणामस्वरूप वर्तमान में इसमें कुल 448 अनुच्छेद (25 भागों में विभाजित) और 12 अनुसूचियां हैं। इसके साथ ही इसमें पांच परिशिष्ट भी जोड़े गए हैं, जो पहले नहीं थे।
संविधान में दिए गए हैं छह मौलिक अधिकार
संविधान के तीसरे भाग में छह मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है। वस्तुतः मौलिक अधिकार का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र की भावना को प्रोत्साहन देना है। यह एक प्रकार से कार्यपालिका और विधायिका के मनमाने कानूनों पर निरोधक की तरह कार्य करता है। मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में इन्हें न्यायालय के माध्यम से लागू किया जा सकता है। इसके अलावा भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्षता को भी इसकी प्रमुख विशेषता माना जाता है। धर्मनिरपेक्ष होने के कारण भारत में किसी एक धर्म को विशेष मान्यता नहीं दी गई है।