फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Same Gender Marriage: Supreme Court said Let us be blessed just as heterosexual couples, not elite at all

Same Gender Marriage: सुनवाई का 5वां दिन, केंद्र ने कहा- समलैंगिक विवाह याचिकाओं के सवालों को संसद पर छोड़ दें

Wed, 26 Apr 2023 03:07 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 26 Apr 2023 03:07 PM IST
सार

Same-sex marriage Supreme Court hearing Updates: समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में पांचवें दिन की सुनवाई के दौरान बुधवार को केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं।

विज्ञापन
Same Gender Marriage: Supreme Court said Let us be blessed just as heterosexual couples, not elite at all
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में पांचवें दिन की सुनवाई के दौरान बुधवार को केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं। सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मंजूरी देने की मांग वाली याचिकाओं पर उठाए गए सवालों को संसद पर छोड़ने पर विचार किया जाए।

विज्ञापन


एसजी मेहता ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ को बताया कि अदालत एक बहुत जटिल विषय" से निपट रही है, जिसका "गहरा सामाजिक प्रभाव" है। उन्होंने कहा कि 'असल सवाल यह है कि शादी किससे और किसके बीच होगी, इस पर फैसला कौन करेगा।' संविधान पीठ के सदस्यों में न्यायमूर्ति हिमा कोहली, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति एसआर भट भी शामिल हैं।
विज्ञापन


एसजी मेहता ने पीठ से कहा कि विवाह का अधिकार देश को विवाह की नई परिभाषा बनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। संसद ऐसा कानून बना सकती है लेकिन यह पूर्ण अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कानून का कई अन्य कानूनों पर प्रभाव पड़ेगा, जिन पर समाज में और विभिन्न राज्य विधानसभाओं में भी बहस की आवश्यकता होगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिकाकर्ताओं ने परिवार के महत्व, समानता और जीवन के अधिकार का तर्क दिया था
इससे पहले मंगलवार को इस संबंध में कम से कम 15 याचिकाओं के एक समूह पर चौथे दिन सुनवाई की। कोर्ट ने दलीलें पेश करने के आखिरी दिन याचिकाकर्ताओं को सुना। याचिकाकर्ताओं ने परिवार के महत्व, समानता और जीवन के अधिकार का तर्क दिया। 

विशेष विवाह अधिनियम (एसएमए) की व्याख्या पर सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने मंगलवार को टिप्पणी की ...हमें विश्वास नहीं है कि संसद कुछ भी अधिनियमित करने जा रही है... इसमें ऐसी अनसुनी आवाजें हो सकती हैं जो अपने जीवन के तरीके (धार्मिक पहलू) को संरक्षित करना चाहती हैं। पीठ मामले को केवल एसएमए की व्याख्या तक सीमित रखने के मुद्दों पर चर्चा कर रही है क्योंकि विवाह के अन्य पहलू व्यक्तिगत कानूनों द्वारा शासित होते हैं।

इस मामलें में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता चक्रवर्ती ने कहा कि समलैंगिक जोड़े और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को बाहर रखना गोद लेने के उद्देश्य को विफल करता है। अधिवक्ता चक्रवर्ती ने कहा, सभी को भी परिवार रखने का अधिकार है। ऐसे में समलैंगिक जोड़े और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को इस व्यवस्था से बाहर करने से गोद लेने का उद्देश्य ही विफल हो जाता है, जो बच्चे, अनाथ... को एक स्थिर जीवन और प्यार करने वाला परिवार प्रदान कर सकता है।

उन्होंने कहा कि "क्या यह बच्चे के सर्वोत्तम हित में है कि वह अपने दूसरे माता-पिता के साथ संबंध न रखे? याचिकाकर्ता ऐतिहासिक रूप से उत्पीड़ित अल्पसंख्यक का हिस्सा हैं...विपरीत लिंग के जोड़े भी समान सम्मान और सुरक्षा के पात्र हैं।


इन्हें हम विषमलैंगिक जोड़ों के रूप में अपनाएं, कुलीन वर्ग के रूप में नहीं: वकील
एडवोकेट नंदी ने कहा, इन्हें हम विषमलैंगिक जोड़े के रूप में अपनाएं, कुलीन वर्ग के रूप में नहीं। मुझे कई लोगों ने मुझे फोन किया है.. हिसार, छत्तीसगढ़, सूरत से... केंद्र इन्हें वैसे ही मान्यता दे जैसे वे किसी अन्य जोड़े को देते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का कहना है कि ऐसे (ट्रांस) जोड़े पर्सनल लॉ के साथ खिलवाड़ करेंगे। लेकिन ये अपने समुदाय और अपने समाज का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि अदालत को LGBTQ जोड़ों के लिए उत्पन्न होने वाली कठिनाई का अनुमान लगाना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed