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Supreme Court: 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी को छोड़कर, सभी विचारों का सम्मान', सबरीमाला मामले में 'सुप्रीम' टिप्पणी

Thu, 23 Apr 2026 02:12 PM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Thu, 23 Apr 2026 02:12 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले की सुनवाई में कहा कि सभी विचारों का सम्मान है, लेकिन ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ की जानकारी स्वीकार नहीं होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फैसले तथ्यों और कानून पर आधारित होंगे। मामला महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा है।

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Sabarimala Temple case Supreme Court says Respect all views except Whatsapp University News In Hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वह सभी विचारों और जानकार लोगों की राय का सम्मान करता है, लेकिन ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ से आने वाली जानकारी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई, जब धार्मिक स्वतंत्रता और महिलाओं के अधिकारों पर बड़ी बहस चल रही है।

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सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इसमें महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश और विभिन्न धर्मों में प्रचलित परंपराओं के दायरे पर विचार हो रहा है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने विभिन्न स्रोतों से ज्ञान लेने की बात कही। इसी पर जस्टिस बी वी नागरत्ना ने हल्के अंदाज में कहा कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से नहीं।
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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साफ कहा कि कोर्ट सभी विद्वानों और विचारकों का सम्मान करता है, लेकिन व्यक्तिगत राय को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि अदालत तथ्यों और कानून के आधार पर ही फैसला करेगी। कोर्ट ने संकेत दिया कि गलत या अपुष्ट जानकारी को आधार नहीं बनाया जा सकता।


सबरीमाला मामला क्या है?
सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर पहले रोक थी। 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने इस प्रतिबंध को असंवैधानिक बताते हुए हटा दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह परंपरा महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती है। अब इस फैसले से जुड़े व्यापक मुद्दों पर फिर से सुनवाई हो रही है।

धार्मिक स्वतंत्रता पर क्या बहस है?
इस मामले में यह भी तय किया जा रहा है कि किसी धार्मिक प्रथा को ‘जरूरी’ और ‘गैर-जरूरी’ कैसे माना जाए। कोर्ट ने पहले भी कहा था कि यह तय करना बेहद कठिन है। अब संविधान पीठ इस पर स्पष्ट दिशा तय करने की कोशिश कर रही है। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और कोर्ट अलग-अलग पक्षों की दलीलें सुन रहा है। इस फैसले का असर सिर्फ सबरीमाला ही नहीं, बल्कि देश के कई धार्मिक मामलों पर पड़ सकता है। कोर्ट के अंतिम फैसले पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

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