आरटीआई के सवालों ने गुजरात के अधिकारियों की उड़ाई नींद
गुजरात में सरकारी अधिकारियों पर आरटीआई का पहाड़ टूटा है। आरटीआई यानी सूचना का अधिकार कानून के अंतर्गत पूछे गए सवालों के जवाब अधिकारियों को देते नहीं बन रहो हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक अधिकारी जनता के सवालों को लेकर लगातार माथा-पच्ची कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर सरकार बधाईयां कैसे देती हैं? क्या इस तरह के संदेशों को भेजने के लिए कोई खास तरीका अपनाया जाता है? सरकार इन कामों पर कितना खर्च करती है?
अधिकारियों की मानें तो ये अत्यंत ही साधारण सवाल हैं जो शायद ही किसी के जेहन में आएं, लेकिन गुजरात में गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करने वालों ने आरटीआई के तहत सवाल पूछ-पूछ कर उनका जीना मुहाल कर रखा है।
आरटीआई के तहत पूछे गए अजीबो-गरीब सवाल कुछ इस प्रकार है...
1. अगर एक हिंदू सरकारी अधिकारी दाढ़ी रखता है और मुसलमान की तरह कपड़े पहनता है, तो क्या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी? ऐसे शख्स के लिए तबादले के क्या नियम हैं?
2. क्या ज्यादा सिंदूर लगाने वाली हिंदू महिला कर्मचारी के तबादले का कोई नियम है?
3. प्रत्येक दिन सचिवालय में कितने लोग जाते हैं?
अधिकारियों को ऐसे सवालों के जवाब तय समय के अनुसार देने होते हैं। उनके मुताबिक तबादले के नियम और आचार संहिता से जुड़ी जानकारियां निकाने में बड़ी रिसर्च करनी होती है। बहुत से मामलों में तो पूरे दशक का वक्त भी कम पड़ता है।
सरकारी विभागों में महीने भर में ऐसे हजारों आवेदन पहुंच रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो स्टाफ कम है, ऐसे में जो अधिकारी सूचना जुटाने में लगे हैं, उनका ज्यादातर समय सवालों के जवाब ढूंढ़़ने में चला जाता है।