RSS: आरएसएस स्वयंसेवकों को मिलेगी नई ट्रेनिंग; गुजरात में होने वाली संघ की बैठक में हो सकती है घोषणा
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने अंदर लगातार बदलाव कर रहा है। उसने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में ही नहीं, बल्कि कई ज्वलंत विषयों के प्रति अपने मूल विचारों में भी परिवर्तन किया है। अब वह एक और बड़े परिवर्तन की तरफ कदम बढ़ा रहा है। आरएसएस के शताब्दी वर्ष से संघ के स्वयंसेवकों को मिलने वाले प्रशिक्षण में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। इसके अंतर्गत स्वयंसेवकों को नए जमाने की नई चुनौतियों को देखते हुए उन्हें दिए जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया जाएगा। पांच नवंबर से सात नवंबर तक गुजरात में हो रही संघ की बैठक के अंत में इसकी घोषणा की जा सकती है।
अभी आरएसएस अपने स्वयंसेवकों को समाज सेवा के लिए तैयार करने के लिए तीन वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता है। इसमें स्वयंसेवकों को अपना शरीर स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम, अपनी आत्मरक्षा के लिए दंड चलाने के साथ-साथ शाखा और संगठन संचालन की जानकारी देता है। स्वयंसेवकों को राष्ट्र सेवा में पूरी तरह से तैयार करने के लिए उन्हें समाज से जुड़ने और उनके लिए कार्य करने की भी ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें देश की सभ्यता-संस्कृति की गहरी जानकारी देना भी शामिल होता है। अंतिम वर्ष का प्रशिक्षण नागपुर में दिया जाता है।
लेकिन नये जमाने की चुनौतियों को देखते हुए संघ अपने स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में बदलाव करना चाहता है। इसके लिए गुजरात की बैठक में गंभीरतापूर्वक विचार किया जायेगा। सभी सदस्यों की औपचारिक सहमति मिलने के बाद इस पर मुहर लग जायेगी। इसके बाद स्वयंसेवकों को नई ट्रेनिंग के सिस्टम पर विचार किया जाएगा। यह नया सिस्टम संघ के शताब्दी वर्ष यानी 2025 से लागू किया जा सकता है।
आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि राष्ट्र के अंदर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अनेक बड़े बदलाव दिख रहे हैं। इससे भारत के साथ-साथ सम्पुर्व विश्व पर गहरा असर पड़ सकता है। इसे देखते हुए स्वयंसेवकों को बेहतर प्रशिक्षण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस बैठक में इन मुद्दों पर मुहर लग सकती है।
नई जिम्मेदारियां भी
संघ यह भी मानता है कि आने वाले समय में भारत की भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ने वाली है। भारत की नई स्थिति से वैश्विक स्तर पर कई आयामों में बदलाव होने वाला है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सभ्यता-संस्कृति का उदय होने वाला है। संघ इस नई परिस्थिति के लिए भी स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना चाहता है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
राम मंदिर पर भी चर्चा
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी सुनील आंबेकर ने बताया है कि राम मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम पर इस बैठक में चर्चा होगी। साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों पर भी चर्चा की जायेगी। अगले वर्ष 22 जनवरी को राम मंदिर उद्घाटन के कार्यक्रम को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भव्यता के साथ मनाये जाने की तैयारी है। इसके लिए भी इस बैठक में कार्यक्रम तय किए जायेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर का उद्घाटन करेंगे। आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत भी इस अवसर पर उपस्थित रह सकते हैं।