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RSS: संत रविदास की जयंती पर पूरे देश में कार्यक्रम करेगा संघ, सामाजिक समरसता पैदा करना होगा उद्देश्य

Wed, 11 Mar 2026 08:50 PM IST
amit sharma अमित शर्मा
Updated Wed, 11 Mar 2026 08:50 PM IST
सार

संघ ने अपने शताब्दी वर्ष में पूरे देश में एक लाख हिंदू सम्मेलन आयोजित करने का लक्ष्य रखा था। 15 जनवरी से 15 फरवरी के बीच हुए इन कार्यक्रमों का उद्देश्य हिंदू समुदाय की विभिन्न जातियों को एक मंच पर लाकर उनमें आपसी सामंजस्य को बढ़ावा देना था।

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RSS to Hold Nationwide Events on Sant Ravidas Jayanti, Focus on Social Harmony
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : पीटीआई

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) संत रविदास की जयंती (एक फरवरी) पर पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित करेगा। एक फरवरी से 20 फरवरी के बीच आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विभिन्न वर्गों में सामाजिक सद्भाव और समरसता पैदा करना है। संघ हमेशा से सनातन धर्म के विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सामंजस्य और एकता बढ़ाने के प्रयास करता रहा है। ये कार्यक्रम उसी दिशा में एक कड़ी के रूप में देखे जा रहे हैं।   

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इसके पहले संघ ने अपने शताब्दी वर्ष में पूरे देश में एक लाख हिंदू सम्मेलन आयोजित करने का लक्ष्य रखा था। 15 जनवरी से 15 फरवरी के बीच हुए इन कार्यक्रमों का उद्देश्य हिंदू समुदाय की विभिन्न जातियों को एक मंच पर लाकर उनमें आपसी सामंजस्य को बढ़ावा देना था। इन हिंदू सम्मेलनों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सहभोज के कार्यक्रम रखे गए। इनका उद्देश्य सभी वर्गों के बीच खानपान के स्तर पर आपसी संबंधों को बढ़ावा देना था। 
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राजधानी दिल्ली में ही इस तरह के दस हजार से अधिक कार्यक्रम किए जाने की जानकारी है। राजधानी की सभी बड़ी कॉलोनियों में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए और इनमें अच्छी संख्या में लोग शामिल हुए। संघ पदाधिकारियों के अनुसार ये कार्यक्रम काफी सफल रहे हैं। अब उसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए संत रविदास जयंती पर सामाजिक समरसता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 
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संघ हमेशा से एक कुआं, एक श्मशान की बात करता रहा है। वह विभिन्न जातीय वर्गों के बीच फैले जातीय भेदभाव को समाप्त कर उनके बीच एकता स्थापित करने पर जोर देता रहा है। हिंदू सम्मेलनों की सफलता ने संघ की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। आने वाले समय में भी इसी तरह के कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक सद्भाव बढ़ाने की योजना है। 

राजनीति और प्रशासन में बढ़ाई सभी वर्गों की भूमिका 
संघ हमेशा से यह मानता रहा है कि सरकार, प्रशासन और राजनीति में सभी जातीय वर्गों को पर्याप्त भागीदारी दिए बिना जातियों के बीच दूरी को कम करना संभव नहीं होगा। संघ के इसी विचार को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार, या भाजपा शासित राज्यों की सरकारों में सभी जातीय समूहों को पर्याप्त भागीदारी देकर उनको सम्मान देने का काम किया जा रहा है। 

भाजपा ने अपने पार्टी संगठन में भी समाज के सभी जातीय समूहों को पर्याप्त भागीदारी देने की कोशिश की है। यही कारण है कि कभी ब्राह्मण-बनिया की पार्टी कही जाने वाली भाजपा इस समय ओबीसी और अनुसूचित जातियों की राजनीति ज्यादा करती दिखाई दे रही है।  

कैसे हासिल होगा संघ का लक्ष्य
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा था कि हिंदू समाज में जातिगत दूरियां तेजी से कम हुई हैं। शिक्षा और आधुनिकता के प्रचार-प्रसार ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। लेकिन राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति के कारण जातिगत मुद्दों को बढ़ावा देते हैं जिससे जातियां अब तक बनी हुई हैं। संघ के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जातिगत वोट बैंक की राजनीति के दौर में वह जातीय दूरियों को समाप्त कर हिंदू समाज में एकता स्थापित करने के अपने लक्ष्य को वह कैसे हासिल करता है।  


बैठक में क्या होगा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सबसे बड़ी बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 13-15 मार्च तक समालखा में होगी। बैठक में संघ  के आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन सहित 1487 पदाधिकारी शामिल होंगे। संघ एक फरवरी से 20 फरवरी के बीच पूरे देश में संत रविदास की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसका उद्देश्य विभिन्न सामाजिक समुदायों-जातियों में समरसता पैदा करना होगा।   

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