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जनगणना से लेकर जनसंख्या नीति तक: सुनील आंबेकर ने उठाए कई सवाल, कहा- मुद्दे को निष्पक्ष तरीके से देखने की जरूरत
Tue, 29 Sep 2026 10:23 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 29 Sep 2026 10:23 PM IST
सार
आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने जनगणना और देश की जनसंख्या नीति को लेकर कहा कि स्वतंत्रता के बाद इन विषयों पर ठोस नीति बनाने के लिए पर्याप्त अध्ययन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती आबादी को देश की विभिन्न समस्याओं की मुख्य वजह बताने वाली धारणा को बढ़ावा दिया गया।
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आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि देश की जनसंख्या और जनसांख्यिकी से जुड़े मुद्दों को लेकर नीतियां किसी समर्पित अध्ययन के आधार पर बनाई जानी चाहिए थीं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश में जनसंख्या और लोगों को लेकर कोई ठोस नीति लगभग नहीं बनाई गई।
आंबेकर ने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया की शुरुआत ब्रिटिश औपनिवेशिक दौर में हुई थी। उनके अनुसार, उस समय इसके पीछे समाज को एक खास तरीके से वर्गीकृत करने और उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल विभाजन के लिए करने का उद्देश्य था।
जनसंख्या वृद्धि को लेकर क्या बोले सुनील आंबेकर?
आरएसएस प्रचार प्रमुख कहा कि आजादी के बाद जनगणना और जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर इन पहलुओं का अध्ययन करके नीति बनाई जानी चाहिए थी। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में यह धारणा बनाई गई कि भारत की आबादी तेजी से बढ़ रही है और देश की हर समस्या की जड़ बढ़ती जनसंख्या है। उन्होंने कहा कि नीतिगत कमियों या गलतियों पर ध्यान देने के बजाय जनसंख्या वृद्धि को ही समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराने वाली धारणा को बढ़ाया गया।
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उन्होंने कहा कि खासतौर पर आपातकाल से पहले जनसंख्या नियंत्रण को हर समस्या के समाधान के तौर पर पेश किया गया। आंबेकर ने एक अन्य बयान में कहा कि इस मुद्दे में किसी राजनीतिक दल को इस तरह शामिल नहीं होना चाहिए और न ही इसका गलत तरीके से राजनीतिक इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
मुद्दों को धर्मनिरपेक्ष बनाम सांप्रदायिक की बहस से ऊपर उठकर देखें : आरएसएस प्रचार प्रमुख
उन्होंने कहा कि आज भी देश में कई लोग धर्मनिरपेक्षता के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं। ऐसे में इस विषय को पूरी तरह वस्तुनिष्ठ तरीके से देखने की जरूरत है। आंबेकर ने कहा कि मामले को धर्मनिरपेक्ष बनाम सांप्रदायिक की बहस से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। इसके बजाय देश की अखंडता, एकता, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान तथा मूल्यों को सुरक्षित रखने पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन पहलुओं के महत्व को सही तरीके से स्वीकार करना और समझना जरूरी है।
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आंबेकर ने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया की शुरुआत ब्रिटिश औपनिवेशिक दौर में हुई थी। उनके अनुसार, उस समय इसके पीछे समाज को एक खास तरीके से वर्गीकृत करने और उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल विभाजन के लिए करने का उद्देश्य था।
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जनसंख्या वृद्धि को लेकर क्या बोले सुनील आंबेकर?
आरएसएस प्रचार प्रमुख कहा कि आजादी के बाद जनगणना और जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर इन पहलुओं का अध्ययन करके नीति बनाई जानी चाहिए थी। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में यह धारणा बनाई गई कि भारत की आबादी तेजी से बढ़ रही है और देश की हर समस्या की जड़ बढ़ती जनसंख्या है। उन्होंने कहा कि नीतिगत कमियों या गलतियों पर ध्यान देने के बजाय जनसंख्या वृद्धि को ही समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराने वाली धारणा को बढ़ाया गया।
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उन्होंने कहा कि खासतौर पर आपातकाल से पहले जनसंख्या नियंत्रण को हर समस्या के समाधान के तौर पर पेश किया गया। आंबेकर ने एक अन्य बयान में कहा कि इस मुद्दे में किसी राजनीतिक दल को इस तरह शामिल नहीं होना चाहिए और न ही इसका गलत तरीके से राजनीतिक इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
मुद्दों को धर्मनिरपेक्ष बनाम सांप्रदायिक की बहस से ऊपर उठकर देखें : आरएसएस प्रचार प्रमुख
उन्होंने कहा कि आज भी देश में कई लोग धर्मनिरपेक्षता के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं। ऐसे में इस विषय को पूरी तरह वस्तुनिष्ठ तरीके से देखने की जरूरत है। आंबेकर ने कहा कि मामले को धर्मनिरपेक्ष बनाम सांप्रदायिक की बहस से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। इसके बजाय देश की अखंडता, एकता, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान तथा मूल्यों को सुरक्षित रखने पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इन पहलुओं के महत्व को सही तरीके से स्वीकार करना और समझना जरूरी है।