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संघ संगठनों ने शाह के सामने रखा आर्थिक मांगों का पिटारा, शुक्रवार को पक्ष रखेंगे सरकार के मंत्री

Fri, 29 Dec 2017 03:38 AM IST
संजय मिश्र/नई दिल्ली
संजय मिश्र/नई दिल्ली Updated Fri, 29 Dec 2017 03:38 AM IST
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Rss organizations put forward the demand of financial issues on Amit Shah

समन्वय बैठक के जरिए संघ के संगठनों ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के सामने अपनी आर्थिक मांगों का पिटारा रखा है। शुक्रवार को केंद्र सरकार के आला मंत्री संघ की समन्वय बैठक में पहुंचकर अपने मंत्रालयों के कामकाज का हिसाब देंगे। तो संघ संगठनों के पैमाने पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे।

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दरअसल मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ संघ के संगठन अक्सर अपनी चिंता प्रकट करते रहते हैं। उन चिंताओं को सरकार के जरिए दूर करने के लिए संघ और सरकार के बीच समय-समय पर समन्वय बैठकें आयोजित करने का प्रयास संघ के शीर्ष नेतृत्व की पहल पर शुरू हुआ है।
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उस प्रयास के तहत ही गुरूवार को आरके पुरम स्थित संघ के संगठन स्वदेशी जागरण मंच के कार्यालय में भाजपा और संघ के आर्थिक संगठनों की समन्वय बैठक हुई। यह दो दिनों तक चलने वाली यह बैठक शुक्रवार 29 दिसंबर को खत्म होगी। शुक्रवार को इस बैठक में सरकार के आला मंत्रियों को पहुंचना है।
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गुरूवार को दिनभर चली बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल उपस्थित थे। इनके अलावा संघ के आर्थिक संगठनों में गिने जाने वाले भारतीय मजदूर संघ, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान संघ और लघु उद्योग भारती सरीखे संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। 

संघ संगठनों ने शाह के सामने रखा मांगों का पिटारा 

Rss organizations put forward the demand of financial issues on Amit Shah

संघ की समन्वय बैठक के पहले दिन शाह ने अपना पूरा वक्त संगठनों के वृत को सुनने में गुजारा। एक-एक कर संघ के लगभग सभी संगठनों ने अपने एजेंडे के साथ  केंद्र सरकार के जरिए अपनाए जा रहे नीतियों पर अपनी राय रखी।

सूत्र बताते हैं कि बैठक में संघ संगठनों की ओर से मुख्य रूप से कृषि नीति, रोजगार नीति, सहकारीता क्षेत्र की समस्याएं और उपभोक्ता नियमों से जुड़ी बातें रखी गईं। जीएसटी में सरकार के जरिए तमाम सुधार के बाद के हालातों और व्याप्त कमियों पर भी चर्चा हुई।

वैसे भारतीय मजदूर संघ पहले भी बेरोजगारी की समस्या को लेकर सरकार के नीति की आलोचना कर चुका है। तो स्वदेशी जागरण मंच और लघु उद्योग भारती सरीखे संगठन जीएसटी के प्रावधानों पर सार्वजनिक सवाल उठा चुके हैं। भारतीय किसान संघ कृषि उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लगात मूल्य के दोगुना करने की मांग करते रहे हैं। 

गुजरात में भी दिखा था कृषि और बेरोजगारी का मुद्दा
दरअसल भगवा संगठनों की चिंता यह है कि केंद्र सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद भी जमीन पर परिवर्तन नजर नहीं दिख रहा है। मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन उठने के बाद गुजरात के चुनावों में भी कृषि संकट के बेरोजगारी का मुद्दा जमीन पर नजर आ रहा था। सूबे के चुनाव में बेशक भाजपा की जीत हुई है। मगर भगवा संगठन इस मुद्दे को यूं ही नजरअंदाज नहीं करना चाहते हैं।

उन्हें इस बात का भय सता रहा है यदि इन दोनों मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो 2019 के लोकसभा चुनाव में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसलिए गुजरात चुनाव के खत्म होते ही संघ ने यह समन्वय बैठक आयोजित की है। ताकि समय रहते समस्याओं पर काबू पाया जा सके। 

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