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आरक्षण को संघ का पूर्ण समर्थन, भागवत ने बताया हिंदुत्व का मतलब

Wed, 19 Sep 2018 07:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 19 Sep 2018 07:15 PM IST
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RSS Mohan Bhagwat Ayodhya issue in Bhavishya Ka Bharat conference

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 'भविष्य के भारत पर संघ का दृष्टिकोण विषय पर तीन दिवसीय कार्यक्रम के आखिरी दिन सरसंघचालक मोहन भागवत ने आरक्षण की पुरजोर वकालत करते हुए विभिन्न सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण सामाजिक विषमताओं को हटाकर सबको बराबरी पर लाने का प्रावधान है। इसे संघ का पूर्ण समर्थन है। सामाजिक और जातीय विषमताओं को दूर करने के लिए उन्होंने रोटी-बेटी के संबंध पर जोर दिया।


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व्याख्यानमाला में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए भागवत ने कहा कि समस्या आरक्षण नहीं है, इस पर हो रही राजनीति है। दल्तिों-पिछड़ों को आरक्षण की मियाद पर उन्होंने कहा कि यह तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक लाभार्थी खुद न कहें कि अब इसे रोक दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो ऊपर हैं उन्हें झुकना होगा और जो नीचे हैं ऊपर उठना होगा, तभी दोनों बराबरी पर आ पाएंगे। हमने हज़ारों सालों तक समाज के एक वर्ग को निर्बल बना कर रखा। उसको उठकर हमारे बराबर आने में अगर 100 साल भी लगें तो हमें झुकना चाहिए। समाज की शरीर से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि हाथ तो आगे जाएं लेकिन पैर हिलें ही नहीं। 
भागवत का यह बयान उनके तीन साल पहले के उस बयान के ठीक उलट है जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में सामाजिक न्याय के लिए काम करने वाले लोगों की एक समिति बनाई जाए जो समीक्षा करे कि आरक्षण की ज़रूरत कितनी है, किसको है और कब तक।

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आने वाले इस बयान को कुछ बीजेपी सांसदों ने पार्टी की हार के ज़िम्मेदार ठहराया था। इस बार आरक्षण के समर्थन में उनका बयान मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से दो महीने पहले आया है जब पूरे प्रदेश में आरक्षण और एससी एसटी कानून के विरोध में आंदोलन चल रहा है।

भागवत ने कहा कि एससी एसटी एक्ट ठीक से लागू होना चाहिए लेकिन इसका दुरूपयोग न हो, इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए। अत्याचार किसी पर भी हो, अपराध ही है। यह हमारी दुर्भावना की वजह से आया। लेकिन इसे समाज में सद्भावना पैदा कर खत्म किया जाना चाहिए।

जातीय समरसता क़ायम करने के लिए उन्होंने अंतर्जातीय और अंतर्धामिक विवाह पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों के बीच रोटी बेटी के संबंध होने चाहिए। रोटी के संबंध किसी हद तक क़ायम हो गए हैं लेकिन अधिकतर मजबूरीवश हैं। इसे स्वेच्छा से करें। यदि देश में इसका कोई सर्वेक्षण कियी जाए तो इस तरह के विवाहों के सबसे ज्यादा उदाहरण स्वयंसेवकों में ही मिलेंगे। हमें सुनिश्चित करना होगा कि समाज जातियों में न बंटे।

नई शिक्षा नीति
भागवत ने कहा कि आधुनिक शिक्षा में परंपराओं का समावेश कर नई शिक्षा नीति जल्द बनानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि सरकार जल्द ही  नई शिक्षा नीति की घोषणा करेगी और इसमें वेद, रामायण जैसे ग्रंथों से मिले परंपरागत मूल्यों का भी समावेश होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्तर नहीं बल्कि शिक्षकों का स्तर गिरा है।

हिंदी बने राष्ट्रीय भाषा
अंग्रेजी मूलत: अंग्रेजों की भाषा है। यदि हम अपनी भाषा को सम्मान देना शुरु करें तो अंग्रेज़ी का दबदबा अपने आप खत्म होने लगेगा। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने पर ज़ोर देते हुए कहा कि यदि सभा हिंदी भाषी देश की किसी एक अन्य भाया के भी अपनाएँ तो उन राज्यों में होने वाला हिंदी-विरोध कम होगा और हिंदू सभी प्रांतों को जोडऩे का काम कर सकेगी।

राम जन्मभूमि मंदिर
यह पूछे जाने पर कि राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के लिए सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए या दूसरे पक्ष के साथ संवाद करना चाहिए, भागवत ने कहा कि राम तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। उन्हें इमामे हिंद भी कहते हैं।

उनकी जन्मभूमि पर राम का भव्य मंदिर तो बनना ही चाहिए। खासतौर पर जब लेजऱ किरणों से यह सिद्ध हो चुकी है कि वहां पर मंदिर ही था। यदि मुसलमान ख़ुद पहल कर इसे बनवाते हैं तो बरसों से उन पर उठ रही उँगलियाँ झुक जाएंगी।

सूचना मिली, सोचना बंद
संघ की इस आलोचना पर हंसते हुए उन्होंने कहा कि यह कहना सही है लेकिन कहने वालों को यह भी देखना चाहिए कि सूचना देने से पहले उस पर कितना विचार और मंथन हुआ है। सर्वसम्मति होने के बाद ही सूचना आगे दी जाती है। इसीलिए लोग सोचना बंद कर उसे स्वीकार कर लेते हैं।

सरसंघचालक का चुनाव क्यों नहीं?
भागवत ने बताया कि सरसंघचालक तो संघ का प्रमुख नाम के लिए ही है क्योंकि सारी शक्तियाँ सरकार्यवाह के हाथों में होती हैं। सरसंघचालक वही करते हैं जिसके लिए सरकार्यवाह उन्हें इजाज़त देते हैं।

इसीलिए सरकार्यवाह का चुनाव हर तीसरे साल में होता है। यही नहीं बल्कि संघ में हर स्तर पर चुनाव समय पर होता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संगठन है जिसके सभी खातों की जांच ऑडिटर हर साल करता है। 

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