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भाजपा को आरएसएस प्रचारक ही क्यों रास आते हैं सीएम के लिए?

Fri, 17 Mar 2017 01:32 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Fri, 17 Mar 2017 01:32 PM IST
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Rss leader who joined BJP and selected as prime minister and chief minister
- फोटो : AmarUjala

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद के लिए जो नाम सबसे आगे चल रहा है वो है डोइवाला से पार्टी के विधायक चुने गए त्रिवेन्द्र सिंह रावत का। सीएम की मौजूदा रेस में उन्हें ही सबसे मजबूत दावेदार बताया जा रहा है। भाजपा विधायक और राज्य में पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के अलावा रावत की एक और पहचान है वो है आरएसएस के संघ प्रचारक की।

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प्रचारक से भाजपा नेता बने त्रिवेन्द्र सिंह रावत को पार्टी का कर्मठ कार्यकर्ता माना जाता है। आरएसएस का बैकग्राउंड होने के कारण भी सीएम पद पर उनकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। हालांकि इसके पीछे बड़ा कारण ये ही माना जाता है कि आरएसएस में रहकर एक कार्यकर्ता सांगठनिक क्षमता, अनुशासन और बेहतर प्रशासकीय गुणों से लैस हो जाता है। जिससे किसी बड़ी जिम्मेदारी को निभाने में उसे किसी तरह की दिक्‍कत नहीं होती।
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लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है कि कोई आरएसएस प्रचारक इस पद तक पहुंचा हो इससे पहले भी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर वाया प्रचारक ही सीएम की कुर्सी तक पहुंचे थे। आइए डालते हैं आरएसएस के उन प्रचारकों पर एक निगाह जिन्होंने भाजपा में पाया बड़ा मुकाम। 

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ये हैं वो बड़े नाम जिन्होंने भाजपा में भी पाया शीर्ष मुकाम

Rss leader who joined BJP and selected as prime minister and chief minister

दीनदयाल उपाध्याय
प्रचारकों का आरएसएस से भाजपा में आने की शुरूआत हुई पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बाद से। जिन्हें उधारी के तौर पर जनसंघ का काम संभालने और उसे आगे बढ़ाने के लिए आरएसएस से लिया गया था। हालांकि वो बात अलग है कि दीनदयाल फिर कभी संघ में वापस नहीं लौटे और जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। 

अटल बिहारी वाजपेयी
दीनदयाल के बाद आरएसएस से भाजपा में आने वाले दूसरे बड़े नेता था पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया। वाजपेयी ने छात्र जीवन से ही संघ कार्यकर्ता के तौर पर अपनी शुरूआत की थी। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बचपन से ही आरएसएस से जुड़े रहे। लंबे समय तक उन्होंने संघ प्रचारक की भूमिका निभाई और यूपी सहित कई राज्यों के प्रभारी रहे। इसके बाद वह संघ की छात्र इकाई एबीवीपी से जुड़ गए। जिसके कुछ दिन बाद ही उन्होंने सक्रिय राजनीति में अपनी जिम्मेदारी को संभाल लिया।

ये बने मुख्यमंत्री

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सुंदर लाल पटवा
मध्यप्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने सुंदर लाल पटवा भी संघ प्रचारक रहे। साल 1947 से 1951 तक वे संघ प्रचारक रहे। साल 1948 में संघ आंदोलन में सात माह जेल यात्रा भी की। इसके बाद जब 1951 में जनसंघ की स्‍थापना हुई तब वह इसके सक्रिय कार्यकर्ता बने और सीएम की कुर्सी तक पहुंचे।

शिवराज सिंह चौहान 
मौजूदा दौर में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी आरएसएस कार्यकर्ता की भूमिका के बाद राजनीति में आए और संघ के युवा संगठन भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। इसके बाद वह मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष से सीएम की कुर्सी तक पहुंचे।

मनोहर लाल खट्टर
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी पूर्व में संघ प्रचारक रहे हैं। लंबे समय तक उन्होंने इस भूमिका का निर्वाह किया। इसके बाद वह भाजपा से जुड़े और साल 2014 में विधायक चुने गए और फिर राज्य के दूसरे गैर जाट मुख्यमंत्री।

ये केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं आरएसएस प्रचारक
मौजूदा मोदी कैबिनेट में भी कई ऐसे मंत्री हैं जिनकी पृष्ठभूमि आरएसएस प्रचारक या स्वयंसेवक की रही है। इनमें सबसे बड़ा नाम स्वास्‍थ्य मंत्री और भाजपा महासचिव जेपी नड्डा का है, जो भाजपा की युवा इकाई भाजयुमो में भी बड़े पद पर रह चुके हैं। उनके अलावा केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री डा. महेश शर्मा, पैट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और राज्यमंत्री सुदर्शन भगत आदि प्रमुख नाम हैं।
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