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Agriculture: RSS के किसान संगठन का मोदी सरकार पर हमला, ICAR के इस फैसले पर क्यों चुप है शिवराज का मंत्रालय?

Thu, 01 Aug 2024 03:45 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 01 Aug 2024 03:45 PM IST
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सार
सूत्रों का कहना है कि किसान संघ ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और निजी कंपनियों के बीच करार पर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है। इस संदर्भ में किसान संघ ने पूर्व में हुए करार को निरस्त करने की मांग की है।
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RSS Farmers Organisation attacks Modi Government over Agriculture Policy Shivraj Singh Chouhan Ministry silent
संघ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के किसान संगठन भारतीय किसान संघ ने किसानों के मामलों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। संगठन ने बीज और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। इस संबंध में एक प्रस्ताव ओडिशा में भारतीय किसान संघ की दो दिवसीय अखिल भारतीय प्रबंधन समिति की बैठक में पास किया गया।


आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुई इस बैठक में कई प्रस्ताव पास किए गए। इसी अहम बैठक में कृषि लागत कम करने पर मंथन किया गया है। सूत्रों का कहना है कि किसान संघ ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और निजी कंपनियों के बीच करार पर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है। इस संदर्भ में किसान संघ ने पूर्व में हुए करार को निरस्त करने की मांग की है।


सूत्रों का कहना है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्र सरकार के अधीन संचालित होता है, जो कृषि क्षेत्र में शोध कार्य के साथ ही कृषि शिक्षा और प्रचार प्रसार की सबसे बड़ी संस्था है। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्र का कृषि विज्ञान केंद्र के तौर पर देशभर में नेटवर्क हैं। देश में मौजूदा समय में 731 कृषि विज्ञान केंद्र हैं, लेकिन इसके बावजूद में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्र ने साल 2023 में कृषि रिसर्च, कृषि उत्पाद का व्यापार जैसे विषयों को लेकर धानुका, बायर, कोरोमंडल जैसी निजी कंपनियों के साथ करार किया है। इससे संघ का किसान संगठन नाराज है। संगठन का मानना है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्र जैसे संगठन में में निजी कंपनियों की एंट्री देशहित में नहीं है।

संघ से जुड़े नेताओं का कहना है कि इस तरह के समझौते के लिए क्या सार्वजनिक नीति बनाई गई है, क्या समझौते के दस्तावेज सार्वजनिक किये गए हैं, अनुसंधान परिषद् बायर कंपनी से क्या सीखेगा, इन समझौतों में यह स्पष्ट नहीं है। साथ ही ये भी स्पष्ट नहीं है कि किस समस्या को हल करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में देश के किसानों को ये जानने का हक है कि एक संपन्न संस्था की क्या मजबूरी रही है कि उसे विदेशी निजी कंपनियों के साथ समझौता करना पड़ा है। जबकि ये वह निजी कंपनियां हैं, जो कृषि क्षेत्र के आर्थिक और पर्यावरण संकट के लिए जिम्मेदार हैं। ऐसे मामलों में कृषि अनुसंधान परिषद केंद्र कृषि मंत्रालय की तरफ से निर्धारित मापदंडों को ताक पर रखकर ये निर्णय ले रहा है तो देश का कृषि मंत्रालय अनभिज्ञ क्यों है। इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री को शिवराज सिंह चौहान ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

बीज कानून बनाने की मांग, 15 हजार करोड़ का है बाजार
किसान संघ की बैठक में किसान हितैषी बीज कानून बनाने की मांग सरकार से करने का प्रस्ताव पास हुआ है। देश में किसान हितैषी बीज कानून बनाए जाने की मांग को लेकर किसान संघ के नेताओं का कहना है कि देश में बीज कानून नहीं होने की वजह से किसान परेशान हैं। इस वजह से अप्रमाणिक, नकली बीज धड़ल्ले से बाजार में बिक रहे हैं, जिस कारण किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। वहीं, बीजों के दाम नियंत्रण की कोई व्यवस्था न होने की वजह से किसानों की लागत में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। इन हालातों में देश के अंदर किसान हितैषी बीज कानून बेहद ही जरूरी है, जिसको लेकर किसान संघ किसानों का शोषण रोकने के लिए सरकार से तुरंत बीज कानून बनाने की मांग करता है।जिसमें गलत बीज बेचने वालों को सजा की व्यवस्था की जाए।
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