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RSS: आरएसएस ने की मणिपुर में शांति की अपील, कहा- लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा और नफरत के लिए कोई जगह नहीं
Sun, 18 Jun 2023 07:28 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 18 Jun 2023 07:28 PM IST
सार
आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नफरत और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। RSS ने कहा कि दोनों पक्षों को विश्वास की कमी को दूर करना चाहिए, जिससे वर्तमान संकट पैदा हुआ है और शांति बहाल करने के लिए बातचीत शुरू करनी चाहिए।
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आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले।
- फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने रविवार को मणिपुर में जारी हिंसा की निंदा की और स्थानीय प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बलों और केंद्रीय एजेंसियों सहित सरकार से तत्काल शांति बहाल करने के लिए हर संभव कदम उठाने की अपील की। एक बयान में, आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने उनसे पूर्वोत्तर राज्य में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई के साथ-साथ हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों को राहत सामग्री की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।
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उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नफरत और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। आरएसएस ने कहा कि दोनों पक्षों को विश्वास की कमी को दूर करना चाहिए, जिससे वर्तमान संकट पैदा हुआ है और शांति बहाल करने के लिए बातचीत शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरएसएस नागरिक समाज, राजनीतिक समूहों और मणिपुर की आम जनता से भी अपील करता है कि वे वर्तमान "अराजक और हिंसक स्थिति" को समाप्त करने के लिए हर संभव पहल करें और मानव जीवन की सुरक्षा और स्थायी शांति सुनिश्चित करें।
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आरएसएस महासचिव ने कहा कि मणिपुर में पिछले 45 दिनों से लगातार हो रही हिंसा बेहद चिंताजनक है। तीन मई को लाई हराओबा उत्सव (Lai Haraoba Festival) के समय चुराचांदपुर में आयोजित एक विरोध रैली के बाद मणिपुर में जो हिंसा और अनिश्चितता शुरू हुई, वह निंदनीय है। उन्होंने कहा, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सदियों से आपसी सद्भाव और सहयोग से शांतिपूर्ण जीवन जीने वालों के बीच जो अशांति और हिंसा भड़क उठी, वह अभी तक नहीं रुकी है।
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होसबोले ने कहा, "संघ स्थानीय प्रशासन, पुलिस, सेना और केंद्रीय एजेंसियों सहित सरकार से अपील करता है कि वे इस दर्दनाक हिंसा को तुरंत रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएं। शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई के साथ-साथ विस्थापितों के बीच राहत सामग्री की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करें।"
बता दें कि मणिपुर में एक महीने पहले भड़की मैतेई और कुकी समुदाय के लोगों के बीच जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई है। राज्य सरकार ने 11 जिलों में कर्फ्यू लगा दिया है और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं।
होसबोले ने कहा कि भयानक दुख की इस घड़ी में 50,000 से अधिक की संख्या में आरएसएस विस्थापित लोगों और मणिपुर संकट के अन्य पीड़ितों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, आरएसएस का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा और नफरत के लिए कोई जगह नहीं है और संघ यह भी मानता है कि किसी भी समस्या का समाधान शांतिपूर्ण माहौल में आपसी बातचीत और भाईचारे की अभिव्यक्ति से ही संभव है।
होसबोले ने कहा कि आरएसएस सभी से भरोसे की कमी को दूर करने की अपील करता है, जिसके कारण वर्तमान संकट पैदा हुआ है। उन्होंने कहा, इसके लिए दोनों समुदायों के बीच व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। इसे मैतेई लोगों के बीच असुरक्षा और लाचारी की भावना और कुकी समुदाय की वास्तविक चिंताओं को एक साथ बातचीत करके हल किया जा सकता है।
संघ की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने कहा कि 45 दिनों की अंतहीन हिंसा के बाद आखिरकार आरएसएस ने मणिपुर में शांति और सद्भाव के लिए एक सार्वजनिक अपील जारी की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि आरएसएस का जाना-पहचाना दोहरा रवैया पूरी तरह से दिख रहा है, क्योंकि इसकी विभाजनकारी विचारधारा और ध्रुवीकरण की गतिविधियां विभिन्न पूर्वोत्तर की प्रकृति को बदल रही हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री कब "मणिपुर पर कुछ कहेंगे और कुछ करेंगे।