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DPI: डिजिटल बुनियादी ढांचों से सरकारी योजनाओं में बचे दो लाख करोड़, पढ़ें पूरी खबर

Sat, 23 Sep 2023 06:17 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 23 Sep 2023 06:17 AM IST
सार

आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने कहा, पिछले एक दशक में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के उपयोग से सही लाभार्थियों तक पैसा पहुंचा है। इससे फर्जी खातों को खत्म किया गया है। इस कारण करदाताओं के पैसे की भारी बचत हुई है।

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Rs 2 lakh crore saved in government schemes due to digital infrastructure
money - फोटो : iStock

विस्तार

डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) से सरकारी योजनाओं में 27 अरब डॉलर (2.24 लाख करोड़ रुपये) से अधिक की बचत हुई है। साथ ही, कम अवधि में अधिक वित्तीय समावेशन हासिल हुआ है। आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने कहा, पिछले एक दशक में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के उपयोग से सही लाभार्थियों तक पैसा पहुंचा है। इससे फर्जी खातों को खत्म किया गया है। इस कारण करदाताओं के पैसे की भारी बचत हुई है।

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सेठ ने कहा, भारत ने डीपीआई के साथ 7-8 वर्षों में 20 प्रतिशत से 80 प्रतिशत खाता खोलने की पहुंच हासिल कर ली है। अगर सामान्य तरीके से किया जाता तो इतना खाता खोलने में 47 साल लग जाते। हमने अंतिम छोर तक और यहां तक कि देश के सबसे दूरदराज के हिस्सों में भी सर्वोत्तम श्रेणी की सेवाएं प्रदान करने के लिए एक समाधान दृष्टिकोण विकसित किया है। डिजिटल पहचान संख्या, प्रधान मंत्री जन धन योजना के 2014 में लॉन्च के बाद से 50 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं। इसमें से 56 प्रतिशत बैंक खाताधारक महिलाएं हैं। 67 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। इन खातों में औसत बैलेंस राशि 4,000 रुपये से अधिक है। डिजिटल भुगतान प्रणाली का यूपीआई अकेले अगस्त महीने में 10 अरब का आंकड़ा पार कर गया है। आज, 5.5 करोड़ से अधिक जन धन खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) लोगों को मिल रहा है। 

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घरेलू उत्पादन से पूरी होगी 70% जरूरत
देश में आईटी हार्डवेयर जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा, सरकार का लक्ष्य तीन वर्षों में स्थानीय उत्पादन से आईटी हार्डवेयर की 70 फीसदी जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य है। इससे इन वस्तुओं के आयात पर निर्भरता कम होगी।
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चंद्रशेखर ने कहा, डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को करीब 80 फीसदी आपूर्ति आयात से होती है। हम यह चाहते हैं कि जो भी सूत्र हों, उन पर भरोसा किया जाए। अभी हमारी जरूरत का 8-10 फीसदी ही घरेलू स्तर से पूरा होता है। तीन वर्षों में इसे 65-70 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है। डेल, एचपी और लेनोवो सहित कम से कम 40 कंपनियों ने 4.65 लाख करोड़ रुपये के पर्सनल कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और अन्य उपकरण बनाने के लिए आईटी हार्डवेयर पीएलआई योजना के लिए आवेदन किया है। अगर इन कंपनियों को चुन लिया जाता है तो सरकार को 17,000 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन के मुकाबले प्रोत्साहन राशि को 22,890 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की जरूरत होगी। आईटी हार्डवेयर के आयात पर अचानक प्रतिबंध के बारे में कंपनियों ने चिंता जताई है। आईटी राज्य मंत्री ने कहा कि वह कंपनियों से मिलेंगे और प्रस्तावित आईटी हार्डवेयर आयात प्रतिबंध पर मसौदा नियम साझा करेंगे। 


 

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