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महंगाई ने बढ़ा दी 'फांसी के फंदे' की कीमत, जेल में रखना पड़ता है कई फंदों का स्टॉक

Mon, 22 Feb 2021 03:55 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 22 Feb 2021 03:55 PM IST
सार

  • कपास की कीमत बढ़ने से बढ़ी फांसी के फंदे की कीमत। अफजल गुरु के फांसी के फंदे को 2000 रुपये में मंगवाया गया था।
  • निर्भया के दोषियों के फंदे की कीमत बाइस सौ के पास पहुंच गयी थी। शबनम की फांसी के फंदे की कीमत और बढ़ सकती है

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Rope used for execution of death penalty convicts getting costlier due to increased price of cotton and yarn
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

महंगाई का असर सिर्फ डीजल और पेट्रोल पर ही नहीं पड़ा है बल्कि महंगाई का असर 'फांसी के फंदे' तक पर पड़ गया है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि फांसी का फंदा आज से दस साल पहले की कीमत से काफ़ी ज्यादा महंगा हो गया है। यह महंगाई कपास की बढ़ी हुई कीमतों के अलावा धागों की बढ़ी कीमतों के कारण हुई है। दरसल फांसी का फंदा कपास और अन्य कई तरह के धागों से मिलकर बनाया जाता है।

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जेल विभाग के सूत्रों के मुताबिक बीते कुछ सालों में फांसी के फंदे की कीमत बढ़ गयी है। 2013 में जब अफजल गुरु को फांसी दी गयी थी, तब दिल्ली की तिहाड़ जेल में 100 मीटर रस्सी से पांच फांसी के फंदे बनवाये गए थे। इसके लिए जेल प्रशासन ने बक्सर जेल प्रशासन को 2000 रुपये का भुगतान किया था। यानी एक फांसी का फंदा पांच सौ रुपये का पड़ा था।
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2015 में जब मुंबई दंगों के आरोपी याकूब मेनन को फांसी दी गयी थी। तब फांसी के फंदे की कीमत 1725 रुपये थी। उसके बाद दिल्ली में निर्भया को फांसी दिए जाने वाले मामले में शुरुआत से अहम भूमिका में रहने वाले एक जेल अधिकारी ने बताया कि जब निर्भया के दोषियों को फांसी दी गयी थी, तब एक फंदे की कीमत तकरीबन 2170 रुपये के करीब हो गयी थी। अब शबनम के केस में भी फंदे की कीमत बढ़ने का अनुमान है।
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फंदे की बढ़ी कीमत के बारे में तिहाड़ जेल के पूर्व लॉ ऑफिसर सुनील गुप्ता कहते हैं कि फांसी का फंदा कपास से बनाया जाता है। बीते कुछ सालों में इसकी कीमत बढ़ी तो कपास से जितने प्रोडक्ट बनते हैं, सभी कीमत बढ़ गयी। इसके अलावा विशेष प्रकार के कपास की ज़रूरत पड़ती है जो बहुत ही मुलायम हो। ऐसी कपास बक्सर में भी मिलती है, इसके अलावा पंजाब से भी यही कपास मंगवाई जाती है। जिससे लागत बढ़ जाती है।

पीतल के बुश की कीमत भी बढ़ गयी

फांसी के फंदे में पीतल का बुश भी लगाया जाता है। ताकि फंदे में ग्रिप बनी रहे। इस बुश की भी कीमत बढ़ गयी है। यही वजह है कि फांसी के फंदे की कीमत पहले की तुलना में कुछ ज्यादा बढ़ गयी है।

तिहाड़ जेल में इंदिरा गांधी के हत्यारों की फांसी से लेकर रंगा बिल्ला और अफजल गुरु समेत पांच अन्य को फांसी के तख्ते पर झूलते हुए देखने वाले तिहाड़ जेल के पूर्व लॉ ऑफिसर सुनील गुप्ता कहते हैं कि फांसी के फंदे की कीमत लगातार बढ़ रही है। हालांकि इसकी अपने देश मे अब तक जरूरत बहुत ज्यादा नहीं पड़ी, लेकिन पिछले आठ दस सालों में गौर करें तो महंगाई बढ़ने पर फांसी के फंदे महंगे हुए हैं।

जितने लोगों को फांसी पर चढ़ाया जाता है, उससे ज्यादा ही फांसी के फंदे बक्सर की जेल से मंगवाए जाते है। ताकि फांसी देते वक्त किसी भी प्रकार की अड़चन सामने न आए।

स्टॉक में रखने पड़ते हैं फांसी के फंदे

जेल मैनुअल के मुताबिक फांसी की रस्सी का जेल में स्टॉक रखना पड़ता है। ताकि जरूरत पर कम न पड़े। 2013 में जब अफजल गुरु को फांसी दी जा रही थी, तब तीन फांसी के फंदे टूट गए थे। चूंकि फंदे ज्यादा थे इसलिए अफजल के केस में कोई दिक्कत नहीं हुई।

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