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मानवीय दृष्टिकोण ने बांध रखे हैं रोहिंग्या मुसलमानों पर प्रधानमंत्री के हाथ

Fri, 01 Sep 2017 11:13 PM IST
शशिधर पाठक/ नई दिल्ली
शशिधर पाठक/ नई दिल्ली Updated Fri, 01 Sep 2017 11:13 PM IST
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rohingya muslims refugees creating problems for India

म्यामार से भागकर आए रोहिंग्या मुसलमानों ने भारत की नाक में दम कर रखा है। शरणार्थी की तरह जान बचाकर भारत आया यह समुदाय जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों में जाकर बस गया है और वहां अमन स्थापित करने में चुनौती बन गया है।

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भारत इन्हें वापस म्यामार भेजना चाहता है लेकिन अपने जान माल का हवाला देकर रोहिंग्या जाने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में रोहिंग्या की सुरक्षा, पुनर्वास, उनके कारण होने वाली सुरक्षा चिंताएं भारत सरकार के लिए बड़ी चुनौती हैं। इन सबके बावजूद मानवीय दृष्टिकोण ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथ बांध रखे हैं।
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भारत में 40 हजार से अधिक रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं। आतंकी घटनाओं में इन युवाओं का नाम आ रहा है। सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए भारत सरकार इन अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को वापस भेजने के लिए दृढ़ है। वहीं यह समुदाय वापस जाने के लिए तैयार नहीं है। 
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रोहिंग्या मुसलमानों का कहना है कि वापस म्यामार लौटकर जाने पर इन्हें मार दिया जाएगा। इसके बाबत वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है। उच्चतम न्यायालय इस मामले में चार सितंबर 2017 को सुनवाई करेगा।

म्यामार में दमन

rohingya muslims refugees creating problems for India
pm modi

रोहिंग्या समुदाय के अनुसार म्यामार में वहां के सुरक्षा बल काफी सख्ती से उनके विरुद्ध कार्रवाई कर रहे हैं। इसके चलते इस समुदाय के लोग जान बचाकर भारत और बांग्लादेश में अवैध तरीके से घुसपैठ करके शरण ले रहे हैं।  रोहिंग्या के इस तरह से आने से जहां शरणार्थी बोझ बढ़ रहा है, वहीं इस समुदाय के लोग कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहे हैं। ऐसे में भारत चाहता है कि म्यामार उसकी चिंताओं को समझे।

प्रधानमंत्री करेंगे चर्चा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच सितंबर 2017 को म्यामार जाएंगे। वह ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद म्यामार रवाना हो जाएंगे। इस दौरान उनकी राष्ट्रपति यू हाटिन क्याव के साथ रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों को लेकर चर्चा होगी। समझा जा रहा है कि भारत इसके बाबत अपनी चिंता साझा करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी वहां की स्टेट काऊंसलर और कद्दावर नेता आंग सान सू ची से भी मिलेंगे। पिछले साल अक्टूबर महीने में आंग सान सूची भारत आई थी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आसियान देशों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए नवंबर 2014 में म्यामार गए थे। 

पहली बार प्रधानमंत्री म्यामार की स्टेट विजिट पर जा रहे हैं और दौरान उनका वहां द्विपक्षीय चर्चा का कार्यक्रम है। बताते हैं रोहिंग्या को लेकर वापस लेने के लिए आंग सान सू ची भी अनिच्छुक है। ऐसे में यह मसला काफी पेंचीदा होता जा रहा है।

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