डीडीसीए चुनाव: सहवाग और गंभीर जैसे खिलाड़ी देने वाली संस्था के चुनाव में खूब हुई हाथापाई, जेटली चुटकियों में सुलझा लेते थे मामले
जब तक अरुण जेटली यहां पर सक्रिय थे, वे ज्यादातर मामलों में आपस में मिल-बैठकर ही चुनाव के मामले सुलझा लेते थे। कई बार चुनाव निर्विरोध ही संपन्न होता रहा है। उनके राजनीतिक कद को देखते हुए सदस्य उनकी बात मान लिया करते थे।
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दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष और सचिव पदों के लिए दूसरे दिन मंगलवार को हुए मतदान में प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के बीच जमकर हाथापाई हुई। अध्यक्ष पद हेतु चुनाव लड़ रहे अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विकास सिंह के गुट ने एक दूसरे पर धांधलेबाजी करने के आरोप लगाए।
वहीं, सचिव पद के लिए रोहन जेटली के ग्रुप से विनोद तिहारा कथित तौर पर अपने बाहुबली समर्थकों के माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करते हुए दिखाई पड़े। बुधवार को तीसरे दिन मतदान के बाद 28 अक्तूबर को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर जैसे टॉप क्लास के खिलाड़ी देने वाली संस्था के चुनाव में बढ़ रहे बाहुबल के प्रयोग और धांधलेबाजी पर सदस्यों ने चिंता जताई है।
डीडीसीए सदस्यों से मिली जानकारी के अनुसार, सबसे ज्यादा विवाद रोहन जेटली ग्रुप के सचिव पद के प्रत्याशी विनोद तिहारा के कारण पैदा हुआ था। कथित तौर पर उन्होंने अपने विवादित समर्थकों के साथ मतदान प्रभावित करने की कोशिश की। अध्यक्ष पद पर रोहन जेटली के सामने खड़े सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विकास सिंह के समर्थन में डीडीसीए पहुंचे कुछ वकील भी तिहारा के समर्थकों से लड़ते दिखाई पड़े।
विकास सिंह को कीर्ति आजाद और बिशन सिंह बेदी का समर्थन हासिल है।
भटकते दिखाई पड़े रोहन जेटली
50 करोड़ रुपए सालाना बजट वाले क्लब डीडीसीए के चुनाव में केवल इसके 4300 सदस्य ही मतदान करते हैं। जब तक अरुण जेटली यहां पर सक्रिय थे, वे ज्यादातर मामलों में आपस में मिल-बैठकर ही चुनाव के मामले सुलझा लेते थे। कई बार चुनाव निर्विरोध ही संपन्न होता रहा है। उनके राजनीतिक कद को देखते हुए सदस्य उनकी बात मान लिया करते थे।
लेकिन जेटली के जाने के बाद (मीडिया पर्सनालिटी रजत शर्मा के बाद) उनके बेटे रोहन जेटली पिछले 10 महीने से अध्यक्ष पद पर काम कर रहे हैं। अब वे पूरे तीन साल के लिए अध्यक्ष पद हेतु चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन पिता की छवि के बाद रोहन जेटली को अपने चुनाव में जमकर पसीना बहाना पड़ रहा है। वे दिन-रात एक-एक सदस्यों से व्यक्तिगत संपर्क कर एक-एक वोट का जुगाड़ करते हुए देखे जा रहे हैं।
जेटली ऐसे सुलझा लेते थे विवाद
भाजपा के पूर्व नेता अरुण जेटली लगातार 14 वर्षों तक डीडीसीए के चेयरमैन पद पर बने रहे। उनके समय में ज्यादातर तो चुनाव की स्थिति ही नहीं आई। लेकिन जबी कभी भी डीडीसीए के सदस्यों के बीच मतभेद की स्थिति आती थी, सुलझे राजनेता अरुण जेटली ऐसे मामले आपस में बैठकर ही हल करा दिया करते थे और कभी विवाद की स्थिति सामने ही नहीं आई।
यहां तक कि प्रसिद्ध क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने जब अरुण जेटली पर डीडीसीए में रहते हुए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, तब भी मामला इस हद तक आगे नहीं गया था। आज जब मतदान के दिन सदस्यों के बीच जमकर हाथापाई हो रही थी, डीडीसीए के सदस्य इसी बात की चर्चा कर रहे थे कि यदि जेटली होते तो स्थिति इस हद तक कभी न पहुंचने पाती।
डीडीसीए के सदस्य ने कहा...
डीडीसीए के सदस्य समीर बहादुर ने अमर उजाला को बताया कि वे पिछले 30 वर्षों से संगठन के चुनाव से जुड़े हुए हैं और अब तक इसे बेहद सभ्य तरीके से संपन्न होते हुए देखते रहे हैं। लेकिन ऐसा पहली बार देखने में आ रहा है कि अब इतने प्रतिष्ठित चुनाव में भी हाथापाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस चुनाव में दागियों के चयन से अच्छे खिलाड़ियों के चयन में भी बाधा आ सकती है। इससे अच्छे खिलाड़ियों की जगह दूसरे खिलाड़ियों के चयन जैसी धांधली बढ़ सकती है जिससे न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश के क्रिकेट को नुकसान हो सकता है।