घमासान: पंजाब में बना बनाया खेल क्यों बिगाड़ रही है कांग्रेस, क्या किसी बगावत की कगार पर खड़ी है?
- मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जल्द ही अख्तियार कर सकते हैं कड़ा रुख
- दो दिन पहले सिद्धू के सलाहकार पर कैप्टन और मनीष तिवारी ने फोड़ा था ठीकरा
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पंजाब प्रदेश कांग्रेस और सरकार में इतनी उथल पुथल क्यों मची है? आखिर इसे हवा कौन दे रहा है? क्या पार्टी किसी बगावत की कगार पर खड़ी है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो वरिष्ठ कांग्रेसियों को भी समझ में नहीं आ रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू के साथ तालमेल बना रहे प्रदेश के एक विधायक का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने मिजाज की राजनीति करते हैं। उनकी अकड़ का कमजोर होना जरूरी और कांग्रेस व पंजाब के हित में है। जबकि पार्टी के ही एक पूर्व महासचिव का कहना है कि उन्हें इस समय कांग्रेस की लाइन और लेंथ दोनों ही कम समझ में आ रही है।
यह सवाल तब पैदा हुआ, जब कांग्रेस मंत्री प्रदेश के मुख्यमंत्री से नाराज होकर और उन्हें बदलने की मांग को लेकर कांग्रेस के प्रभारी महासचिव हरीश रावत के साथ देहरादून में बैठक कर रहे थे। यहां नाराज कांग्रेसियों का नेतृत्व पंजाब के परिवहन मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा कर रहे थे। इसमें तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के साथ पंजाब सरकार के मंत्री चरण जीत सिंह चन्नी, सुखबीर सिंह रंधावा भी शामिल हैं। यह पूरा विरोध भी कैप्टन का विरोध और नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बननाने की मांग करने वाले कांग्रेसी कर रहे हैं।
हालांकि बैठक से पहले हरीश रावत ने साफ कर दिया था कि 2022 का विधानसभा चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। बैठक के बाद भी उन्होंने कहा कि पंजाब की सरकार को कोई खतरा नहीं है। कैप्टन के सहयोगी और राज्य सरकार में एक मंत्री का कहना है कि इस मामले में उन्हें कुछ नहीं बोलना चाहिए। इसलिए चुप हैं। कांग्रेस हाईकमान सब कुछ देख रहा है। वह केवल इतना भर कह सकते हैं कि जो हो रहा है, वह कांग्रेस की सेहत के लिए अच्छा नहीं है। इसे पहले अमरिंदर सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा नियुक्त दो सलाहकारों के बयान पर सवाल उठाया था। कैप्टन के समर्थन में पार्टी के प्रवक्ता, सांसद मनीष तिवारी भी उतर गए थे।
बना खेल बिगड़ रहा है
डॉ. अरुण धवन और डॉ. सविता धवन दंपति कांग्रेसी हैं। लुधियाना, जालंधर से लेकर चंडीगढ़ तक सक्रिय रहते हैं। साफ कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी के भीतर बना बनाया खेल बिगड़ रहा है। दो बड़े धड़े टकरा रहे हैं और पूरा पंजाब तमाशा देख रहा है। डॉ. धवन कहते हैं कि किसान आंदोलन के बाद पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जबरदस्त तरीके से जड़ें जमा ली थीं। लेकिन पार्टी के अंदरूनी मुद्दे सतह पर आने के बाद नुकसान तो पार्टी का ही हो रहा है। कैप्टन गुट, प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू और अन्य कांग्रेसियों का आपसी टकराव ठीक नहीं है।
क्या है इसमें छिपा राज?
कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो भी पंजाब में हो रहा है, उससे कांग्रेस और उसका शीर्ष नेतृत्व अनजान नहीं है। उन्होंने कहा कि वह कहीं बैठे हैं और इससे अधिक कुछ नहीं बोलेंगे। मध्यप्रदेश के एक बड़े नेता ने कहा कि इस तरह की घटनाएं पार्टी का कार्यकर्ता होने के नाते दुख पहुंचाती हैं, लेकिन यह सब हो रहा है। अब इसे हरीश रावत और कांग्रेस अध्यक्ष ही जानें।
कांग्रेस पार्टी के एक प्रवक्ता ने इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने केवल इतना कहा कि इसे समय की मांग पर चल रहा दौर मान लीजिए। इसके साथ उन्होंने माना कि कांग्रेस अध्यक्ष की जानकारी में काफी कुछ है। पार्टी मुख्यालय 24 अकबर रोड के एक नेता ने बताया कि पंजाब कांग्रेस में चल रहे घटनाक्रम को लेकर हमारे शीर्ष नेता अपने नेताओं के संपर्क में हैं।
उन्होंने उम्मीद जाहिर की सोनिया गांधी की पंजाब के प्रभारी हरीश रावत से बात हुई होगी। हरीश रावत अगले एक दो दिन में दिल्ली भी आ सकते हैं। वहीं, पंजाब में एक कैप्टन का भी खेमा है। वह हालात पर नजर रख रहा है।
बादल को हराकर आए थे और 'बादलों' से ही संबंध का लग रहा आरोप
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह 2017 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख प्रकाश सिंह बादल को हराकर सत्ता में आए थे। अब नवजोत सिंह सिद्धू के साथ के कांग्रेसी और कैप्टन के विरोधी कांग्रेसी उन पर बादलों (प्रकाश सिंह और सुखवीर सिंह बादल) से सांठ-गांठ का आरोप लगा रहे हैं। कैप्टन गुट के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि उड़ लीजिए नई पतंग पहले उड़ती है, लेकिन जल्द ही हवा में तैरकर जमीन पर आ जाती है। एक दो हफ्ते में सब ठीक हो जाएगा। होशियारपुर के नेता का कहना है कि लोग कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनकी सियासत को नहीं जानते। जल्द दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।