पंजाब कांग्रेस में घमासान: सवालों में नवजोत सिद्धू के सलाहकार नहीं हैं, असल निशाना तो सिद्धू को अध्यक्ष बनाने के फैसले पर है
- कैप्टन अमरिंदर सिंह का साथ दिया है मनीष तिवारी ने
- अभी तो चिंगारी फूंट रही है, लेकिन नीचे दबी है ज्वाला
विस्तार
पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकारों के बयान की आड़ में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का कुपित होना, कोई सामान्य बात नहीं है। यह पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही एक हलचल का संकेत है। कैप्टन के कुपित होने और नसीहत देने के कुछ समय बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने दो सलाहकारों को तलब किया था। कुछ नसीहत के साथ उन्हें विदा किया। लेकिन कांग्रेस पार्टी के सांसद मनीष तिवारी से नहीं रहा गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह का साथ देते हुए उन्होंने भी पार्टी के प्रभारी हरीश रावत से मामले में दखल देने की मांग तक कर डाली।
इस समय प्रदेश कांग्रेस में धीरे-धीरे दो खेमे बन रहे हैं। एक खेमा कैप्टन अमरिंदर सिंह का है और दूसरा खेमा नवजोत सिंह सिद्धू का है। सिद्धू के खेमे और कैप्टन से नाराज कांग्रेसी सिद्धू के सलाहकारों (मलविंदर सिंह माली और डॉ. प्यारे लाल गर्ग) के बयान को अनुचित मानते हैं। लेकिन इसके साथ-साथ वह यह भी कहते हैं कि यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं है, जिस पर मुख्यमंत्री इतना बड़ा तूफान खड़ा करें। परगट सिंह समेत अन्य इसे बहुत गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। सिद्धू गुट के एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा कि शुरू में गलतियां हो ही जाती हैं। धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।
असल निशाना किधर है, यह समझिए
कैप्टन के सचिवालय से जुड़े वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि उन्हें तो इसका अंदेशा पहले से ही था। वह कहते हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष का है। जबकि कैप्टन इसके बहुत पक्ष में नहीं थे। अब नवजोत सिंह सिद्धू अपना हुनर दिखा रहे हैं। लुधियाना के कांग्रेस के नेता कहते हैं कि दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय। इसलिए अभी कुछ भी कहने का फायदा नहीं है।
मनीष तिवारी के भड़कने के सवाल पर वह कहते हैं कि मनीष का भड़कना जायज है। दोनों ही सलाहकारों के बयान को अच्छा नहीं कहा जा सकता। इंदिरा गांधी के बारे में इस तरह का कृत्य सही नहीं कहा जाएगा। इसी के साथ वह कहते हैं कि मनीष तो जी-23 समूह से भी जुड़े हैं।
दरअसल कैप्टन का खेमा नवजोत सिंह सिद्धू की कार्य प्रणाली और उनके सलाहकारों पर हमला बोलकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्णय की तरफ इशारा कर रहा है। कांग्रेस के राज्यसभा के एक सांसद कहते हैं कि हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और सोच-समझकर बोलना चाहिए। इसके साथ-साथ किसी को यदि कोई जिम्मेदारी दी गई है तो उसे कुछ समय तक काम करने का अवसर देना चाहिए।