सेवानिवृत सरकारी कर्मियों के जीपीएफ को लेकर सामने आई ये बड़ी बाधा, इस तरह निकलेगा समाधान

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 08 Aug 2020 06:39 PM IST
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सार

यह समस्या उन कर्मियों के सामने ज्यादा आ रही है, जो अपनी सेवा के दौरान एक संस्थान से दूसरे संस्थान में जाते रहे हैं। केंद्र सरकार ने अब अपने सभी कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे जीपीएफ खाते के मिसिंग क्रेडिट की सूचना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अवश्य दें..

विस्तार

केंद्र सरकार के रिटायर्ड कर्मियों के 'जीपीएफ' यानी जनरल प्रोविडेंट फंड को लेकर एक बड़ी बाधा सामने आ गई है। देखने में यह आया है कि अनेक रिटायर्ड कर्मियों के जीपीएफ खाते को लेकर सही स्थिति सामने नहीं आ पा रही है। किसी कर्मचारी के खाते में जो राशि है, उसमें ब्याज नहीं जोड़ा गया है तो कहीं पर सही राशि नहीं दिखाई जा रही।
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इसकी मुख्य वजह कर्मियों के जीपीएफ खाते में क्रेडिट एंट्री का समय पर नहीं होना है। यह समस्या उन कर्मियों के सामने ज्यादा आ रही है, जो अपनी सेवा के दौरान एक संस्थान से दूसरे संस्थान में जाते रहे हैं। केंद्र सरकार ने अब अपने सभी कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे जीपीएफ खाते के मिसिंग क्रेडिट की सूचना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अवश्य दें। यह सूचना उस अधिकारी के पास भेजी जाएगी जो जीपीएफ अभिदान की कटौती के लिए जिम्मेदार होगा। यह जानकारी उस कर्मी को भी दी जाएगी, जिसके जीपीएफ में कमी पाई गई है।
 
भारत सरकार के पेंशन विभाग के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से अनेक रिटायर्ड कर्मियों की शिकायतें आ रही थीं। उनकी समस्या अपने जीपीएफ को लेकर थी। जो कर्मी अपनी सेवा के दौरान एक संस्थान से दूसरे संस्थान में चले जाते हैं, विदेश में प्रतिनियुक्ति पर जाते हैं या अखिल भारतीय सेवा के तहत किसी दूसरे कैडर में चले जाते हैं, इनके साथ जीपीएफ की समस्या देखने को मिली है।
ऐसा इसलिए होता है कि एक एस्टेब्लिशमेंट के द्वारा जो सेलरी बिल बनाए जाते हैं और जीपीएफ राशि की कटौती की जाती है, वह पहले वाले विभाग से अलग होती है। यह कमी दो विभागों के बीच पर्याप्त तालमेल न होने के कारण भी सामने आती है। अगर दोनों विभागों में सामंजस्य और समय पर सूचनाओं का आदान-प्रदान हो जाए तो इस तरह की दिक्कतों से छुटकारा पाया जा सकता है।

इस तरह की शिकायतों को दूर करने व प्रशासन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक कार्यालय जीपीएफ खाते की मिसिंग क्रेडिट एंट्री का अनिवार्य तौर पर रिकार्ड रखे और हर वित्तीय वर्ष में उसकी सूचना संबंधित कर्मचारी व उस अधिकारी को दे, जो जीपीएफ अभिदान की कटौती के लिए जिम्मेदार हैं।

कर्मचारी के रिटायरमेंट से दो वर्ष पहले और उसके बाद रिटायरमेंट से एक वर्ष पहले संबंधित कर्मी के जीपीएफ खाते का पूर्ण विवरण दिया जाए। इसमें सेवाकाल से जुड़ी क्रेडिट, डेबिट और ब्याज की तमाम एंट्री शामिल हों। इस तरह के मामलों में कोई भी कर्मचारी अपने कार्यालय में सुनवाई के लिए आवेदन दे सकता है।

ऐसे मामलों का समाधान 60 दिन में किया जाएगा। सभी मंत्रालयों और विभागों को इन हिदायतों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया है।
 
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