CAT: कैट में सेवानिवृत्त नौकरशाह सरकार के खिलाफ आदेश देने में हिचकिचा रहे; भारी पड़ा कानूनी शुल्क का बोझ!
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केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता सी. श्रीकुमार ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति बीआर गवई की स्पष्ट टिप्पणियों का स्वागत किया है। मुख्य न्यायाधीश ने हाल ही में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के 10वें वार्षिक सम्मेलन में उसके कामकाज पर चिंता जताई थी। सीजेआई ने कहा, कई प्रशासनिक सदस्य, अक्सर सेवानिवृत्त वरिष्ठ नौकरशाह, सरकार के खिलाफ आदेश देने से हिचकिचाते हैं। वे इस जिम्मेदारी को उच्च न्यायालयों पर डालना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अनिच्छा के कारण कैट के फैसलों के खिलाफ कई अपीलें दायर की गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप अनावश्यक मुकदमेबाजी और न्याय मिलने में लंबी देरी हो रही है।
सी. श्रीकुमार, जो 1985 में न्यायाधिकरण की स्थापना के बाद से सरकारी कर्मचारियों की ओर से मुकदमे लड़ रहे हैं, ने मुख्य न्यायाधीश के बयान का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा, 'कैट' के कुछ प्रशासनिक सदस्य यह भूल जाते हैं कि वे अब नौकरशाह नहीं रहे। वे एक न्यायिक मंच पर बैठते हैं, जहां उनसे बिना किसी भय या पक्षपात के न्याय करने की अपेक्षा की जाती है। दुर्भाग्य से, कई लोग अभी भी अपनी सरकार समर्थक मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। मुकदमेबाजी का पूर्व अनुभव न रखने वाले कुछ न्यायिक सदस्य भी सेवा मामलों की पेचीदगियों को समझने में संघर्ष करते हैं।
श्रीकुमार ने कहा, इससे अक्सर अनावश्यक देरी होती है और सरकार को कर्मचारियों के अभ्यावेदनों का एक निश्चित समय सीमा के भीतर निपटारा करने के लिए नियमित निर्देश दिए जाते हैं। इस बीच, कर्मचारियों पर भारी कानूनी शुल्क का बोझ पड़ता है। लंबित मामलों की चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा करते हुए, श्रीकुमार ने बताया कि कैट के समक्ष 12 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं। उन्होंने इस संख्या के लिए कर्मचारियों की सेवा संबंधी शिकायतों के प्रति सरकार और उसकी नौकरशाही की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया।
"संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र (जेसीएम), जिसका गठन मूल रूप से ऐसे विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए किया गया था, अब निष्क्रिय हो गया है। कई सदस्यों ने एक दशक से भी ज़्यादा समय से एक भी बैठक में भाग नहीं लिया है। कर्मचारियों के पास अब 'कैट' के पास जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उनके लिए मुक़दमा ही एकमात्र सहारा बन गया है, लेकिन ये तरीका महंगा और समय लेने वाला, दोनों है।
श्रीकुमार ने सर्वोच्च न्यायालय से कैट के सदस्यों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने का आह्वान किया है, ताकि न्यायनिर्णयन में स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सरकार से न्यायाधिकरण के आदेशों के ख़िलाफ़ बेतुकी अपीलों को कम करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा, "जब तक सरकार संयम नहीं दिखाएगी, कैट अपनी विश्वसनीयता खो देगा और कर्मचारियों को अपने मामले जीतने के बावजूद देरी का सामना करना पड़ता रहेगा। कर्मचारी नेता ने आशा व्यक्त की है कि मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप से कैट के कामकाज में व्यवस्थित सुधार आएंगे। यह सुनिश्चित होगा कि इसका मूल उद्देश्य—सेवा मामलों का त्वरित और प्रभावी समाधान, एक दूर का सपना न रह जाए।