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समलैंगिकों के नागरिक अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर
Tue, 16 Apr 2019 08:02 PM IST
Gaurav Pandey
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Tue, 16 Apr 2019 08:02 PM IST
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सर्वोच्च न्यायालय (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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समलैंगिक समुदाय के लोगों के नागरिक अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। याचिका में उस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की गई है जिसके तहत एलजीबीटीक्यू समुदाय (समलैंगिक समुदाय) के लिए समलैंगिक विवाह, गोद लेने और किराये की कोख के अधिकार जैसे विभिन्न अधिकारों की मांग करने वाली एक याचिका खारिज दी गई थी।
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शीर्ष अदालत ने 29 अक्टूबर, 2018 को तुषार नैयर की वह अर्जी खारिज कर दी थी जिसमें सहमति से समलैंगिक संबंध बनाने को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के अलावा एलजीबीटीक्यू समुदाय को नागरिक अधिकार देने की मांग की गई थी।
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शीर्ष अदालत ने कहा था, ‘हम नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत सरकार मामले में छह सितंबर 2018 को इस अदालत द्वारा सुनाए गए निर्णय के बाद इस याचिका पर विचार करने के पक्ष में नहीं हैं।’
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इस आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए अर्जी में कहा गया है कि जो याचिका खारिज कर दी गई, वह बस सहमति से समलैंगिक संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के मुद्दे तक ही सीमित नहीं थी। उस याचिका में एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्यों की समलैंगिक शादियों को (विशेष विवाह कानून, 1954 के तहत) मान्यता नहीं देने, उन्हें गोद लेने और किराये की कोख के अधिकार से वंचित किए जाने का मुद्दा उठाया गया है।
उस अर्जी में एलजीबीटीक्यू के नागरिक अधिकारों की मूल मानवाधिकारों के तहत मांग की गई थी और कहा गया था कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 पर शीर्ष अदालत के फैसले में इन अधिकारों के मुद्दे का समाधान नहीं किया गया था। धारा 377 समलैंगिक संबंध को अपराध मानती थी।