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तिब्बत मसला हल करो: निर्वासित संसद ने दिया सांसदों को भोज तो चीन चिढ़ा, अठावले की तीखी प्रतिक्रिया

Sat, 01 Jan 2022 10:54 PM IST
सुरेंद्र जोशी एएनआई, पुणे,
एएनआई, पुणे, Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 01 Jan 2022 10:54 PM IST
सार

समाचार एजेंसी एएनआई से चर्चा करते हुए अठावले ने कहा कि 1949 में भारत आए थे। उन्हें न्याय अवश्य मिलना चाहिए। चीन को कुछ आपत्ति हो सकती है, लेकिन तिब्बत का मसला अवश्य हल किया जाना चाहिए। हमारे विदेश मंत्री चीन के पत्र का जवाब देंगे।

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Resolve Tibet issue: Parliament in exile gave banquet to Indian MPs, China annoyed, Athawales sharp reaction
रामदास अठावले - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने तिब्बत की निर्वासित संसद द्वारा भारतीय सांसदों को भोज देने पर चीन की आपत्ति का कड़ा विरोध किया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री अठावले ने कहा कि तिब्बत विवाद का हल अवश्य निकालना चाहिए और तिब्बती नागरिकों को परेशानी नहीं होना चाहिए।

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समाचार एजेंसी एएनआई से चर्चा करते हुए अठावले ने कहा कि 1949 में भारत आए थे। उन्हें न्याय अवश्य मिलना चाहिए। चीन को कुछ आपत्ति हो सकती है, लेकिन तिब्बत का मसला अवश्य हल किया जाना चाहिए। हमारे विदेश मंत्री चीन के पत्र का जवाब देंगे।
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भारत स्थित इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने तिब्बत की निर्वासित संसद द्वारा आयोजित रात्रिभोज में भारतीय सांसदों के एक समूह द्वारा शिरकत करने पर कड़ा ऐतराज जताया। चीन ने उम्मीद जताई कि वे तिब्बत की आजादी की मांग करने वाली ताकतों का समर्थन करने से बचेंगे। पिछले सप्ताह सांसदों के एक समूह ने, जिसमें केंद्रीय कौशल विकास व उद्यमिता मंत्री राजीव चंद्रशेखर, भाजपा सांसद मेनका गांधी, बीजद सांसद सुजीत कुमार, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश व मनीष तिवारी तिब्बत की निर्वासित संसद के भोज में गए थे। 
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तिब्बत के प्रवक्ता ने चीन के बयान पर जताई आपत्ति
चीनी दूतावास की आपत्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, भारत स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रवक्ता तेनजिन लेक्ष्य ने चीन की खिंचाई की है। उन्होंने कहा कि तिब्बत के लिए भारत का निरंतर समर्थन चीन को असहज करता है। 1959 के तिब्बती विद्रोह में तिब्बती निवासियों और चीनी सेना के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं। 


14वें दलाई लामा चीनी शासन के खिलाफ असफल विद्रोह के बाद पड़ोसी देश भारत आ गए थे। इसके बाद सर्वोच्च तिब्बती बौद्ध नेता दलाई लामा ने भारत में निर्वासित सरकार की स्थापना की। 2013 में चीन के राष्ट्रपति बनने के बाद से शी जिनपिंग ने तिब्बत पर एक आक्रामक नीति अपनाई। तिब्बतियों के मानवाधिकार उल्लंघन की खबरें भी आई हैं। 

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