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पीएमओ से इस्तीफा : नृपेंद्र मिश्र के बाद पीके सिन्हा का अचानक त्यागपत्र चौंका रहा है सभी को

Tue, 16 Mar 2021 08:22 PM IST
सुरेंद्र जोशी शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 16 Mar 2021 08:22 PM IST
सार

  • पूरा जीवन एक बेदाग अफसर का जिया
  • कैबिनेट सचिव के रूप में दो बार पा चुके हैं सेवा विस्तार

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Resignation from PMO: PK Sinhas sudden resignation after Nripendra Mishra is shocking everyone
पीके सिन्हा - फोटो : social media

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्य सलाहकार (विशेष कार्य अधिकारी/ओएसडी) प्रदीप कुमार सिन्हा ने पीएमओ से त्यागपत्र दे दिया है। 1977 बैच के आईएएस अधिकारी सिन्हा ने निजी कारणों से पद से त्यागपत्र दिया है। हालांकि अधिकारिक वेब साइट पर अभी उन्हीं का नाम चल रहा है। बहरहाल उनके इस्तीफे ने सभी को चौंका दिया है। इसके पहले प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रमुख सचिव पद से नृपेंद्र मिश्र का इस्तीफा भी अचानक हुआ था। अब एकाएक सिन्हा के इस्तीफे से सियासी गलियारों में सवाल उठने लगे हैं।

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पीके सिन्हा भारत सरकार के काबिल अफसरों में रहे हैं। बतौर नौकरशाह उन्होंने उ.प्र. और केन्द्र सरकार में तमाम बड़ी जिम्मेदारियां निभाईं और बेदाग रहे। वह बनारस में कमिश्नर, उ.प्र. सरकार के प्रिसिंपल सेक्रेटरी (सिंचाई), मेरठ विकास प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के सीईओ रहे हैं। केन्द्र सरकार में जहाजरानी मंत्रालय के सचिव और ऊर्जा मंत्रालय के सचिव की जिम्मेदारी निभाई है। 
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सिन्हा, मृदुभाषी, कुशलता से लक्ष्य को साधने वाले नौकरशाहों में गिने जाते हैं। अर्थ शास्त्र की समझ रखते हैं। वह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनामिक्स से स्नातक और अर्थशास्त्र विषय में परास्नातक हैं। उन्होंने इस्तीफा देने का कारण निजी बताया है। जब वह ऊर्जा सचिव थे, उस समय सचिवों में सभी से वरिष्ठ थे। इस आधार पर पूर्व कैबिनेट सचिव अजित सेठ का कार्यकाल पूरा होने के बाद 13 जून 2015 को पीके सिन्हा 31वें कैबिनेट सचिव बनाए गए। कामकाज में निपुण सिन्हा को अप्रैल 2017 में एक वर्ष का पहला सेवा विस्तार दिया गया। मई 2018 में उन्हें दूसरा सेवा विस्तार मिला। कैबिनेट सचिव के तौर पर दोहरा सेवा विस्तार विरले आईएएस अफसरों को ही मिलता है।
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मिश्र के इस्तीफा देने के बाद बने प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार सरकार का गठन होने पर पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्र ही उनके मुख्य सलाहकार (विशेष कार्य अधिकारी) का दायित्व संभाल रहे थे, लेकिन कुछ समय बाद निजी कारण का हवाला देकर नृपेन्द्र मिश्र ने पद से त्यागपत्र दे दिया था। कहा जाता है कि तब नृपेन्द्र मिश्र ने आराम करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद 30 अगस्त 2019 को प्रदीप कुमार मिश्रा प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार नियुक्त किए गए। अपने पद पर 18 महीने तक दायित्व संभालने के बाद 65 साल के पीके सिन्हा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

मिश्र बने राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन, सिन्हा को भी दूसरी जिम्मेदारी संभव
नृपेन्द्र मिश्र प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार के पद से हटने के बाद पिछले साल फरवरी 2020 में राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन बनाए गए। मिश्र अपने इस दायित्व को बहुत कुशलता से संभाल रहे हैं। पीके सिन्हा को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यालय में एक बेहतर तालमेल के साथ काम करने वाले अफसर के रूप में जाना जाता है। कुछ ऐसे ही कारण रहे कि वह 2015 से लगातार प्रधानमंत्री कार्यालय और उनके सचिवालय से जुड़े रहे। उन्हें जानने वालों का कहना है कि क्या पता सिन्हा को कोई और जिम्मेदारी दी जानी हो।

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