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Invention: आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने बनाया अपशिष्ट जल को ऊर्जा में बदलने का उपकरण
Thu, 02 Jun 2022 03:17 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 02 Jun 2022 03:17 AM IST
सार
माइक्रोबियल फ्यूल सेल में अपशिष्ट जल जैसे कार्बनिक पदार्थों का उपयोग इसे पर्यावरण के अनुकूल उपकरण बनाता है। जो जैव-विद्युत उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन का दोहरा लाभ प्रदान करता है।
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आईआईटी गुवाहटी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने माइक्रोबियल फ्यूल सेल (एमएफसी) नामक एक जैव-विद्युत रासायनिक उपकरण बनाया है, जो अपशिष्ट जल का शोधन करके हरित ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।
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अधिकारियों के अनुसार, एमएफसी में अपशिष्ट जल जैसे कार्बनिक पदार्थों का उपयोग इसे पर्यावरण के अनुकूल उपकरण बनाता है। जो जैव-विद्युत उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन का दोहरा लाभ प्रदान करता है। केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मिहिर कुमार पुरकैत और उनके पीएचडी छात्र मुकेश शर्मा ने शोध के नेतृत्व में यह शोध किया गया।
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रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है
बायो-इलेक्ट्रोकेमिकल डिवाइस बैक्टीरिया के माध्यम से कार्बनिक सब्सट्रेट में निहित रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। शोध के मुताबिक, तैयार किए गए कैटायन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (सीईएम) सस्ते होने के साथ-साथ कई अन्य मेम्ब्रेन की तुलना में बेहतर ढंग से काम करते हैं।
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‘एमएफसी’ एक जैव-विद्युत रासायनिक रिएक्टर प्रणाली है जो अवायवीय रोगाणुओं द्वारा उत्प्रेरित कार्बनिक सब्सट्रेट के जैव रासायनिक ऑक्सीकरण में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करती है। एक पारंपरिक एमएफसी रिएक्टर में अवायवीय जैविक एनोड कक्ष, एक एरोबिक जैविक या अजैविक कैथोड कक्ष, और एक विभाजक जैसे प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (पीईएम) शामिल हैं।
आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक टीजी सीताराम ने कहा, तेजी से जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप ऊर्जा की मांग और पर्यावरणीय चिंताओं में वृद्धि हुई है। इससे नवीकरणीय और टिकाऊ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों का विकास हुआ है। बयान के अनुसार, कई नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (सौर, पवन, ज्वरीय और भू-तापीय ऊर्जा, दूसरों के अलावा) के अलावा, टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों में ‘ब्लू एनर्जी’ ऊर्जा कटाई स्रोत भी शामिल हैं।