Glacier: वाडिया इंस्टीट्यूट का शोध- ग्लेशियर पीछे हटने से लद्दाख में बन सकती हैं तीन नई झीलें, पढ़ें पूरी खबर
वाडिया इंस्टीट्यूट ने पार्कचिक ग्लेशियर, सुरु नदी घाटी, लद्दाख के हिमालयी क्षेत्र और भारत के रूपात्मक और गतिशील परिवर्तनों का वर्णन किया है। इसके निष्कर्ष एनल्स ऑफ ग्लेशियोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
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केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का कहना है कि लद्दाख में ग्लेशियर के पीछे हटने के कारण पार्काचिक ग्लेशियर में अलग-अलग आकार की तीन नई झीलें बन सकती है। मंत्रालय के तहत आने वाली स्वायत्त संस्था वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों के अध्ययन के आधार पर यह दावा किया गया है। इस अध्ययन के अनुसार इस प्रकार झीलों का बनना ग्लेशियरों के कारण नष्ट हुए बेसिन और घाटियों की एक विशेषता है। वाडिया इंस्टीट्यूट ने पार्कचिक ग्लेशियर, सुरु नदी घाटी, लद्दाख के हिमालयी क्षेत्र और भारत के रूपात्मक और गतिशील परिवर्तनों का वर्णन किया है। इसके निष्कर्ष एनल्स ऑफ ग्लेशियोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। डॉ. मनीष मेहता के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने इस अध्ययन के लिए मध्यम रिजॉल्यूशन उपग्रह तस्वीरों, 1971 से 2021 के बीच कोरोना केएच-4 और सेंटिनल-2ए और 2015-2021 के बीच क्षेत्र सर्वेक्षण का उपयोग किया।
1971 और 2021 के बीच ग्लेशियर पीछे हटे
रिमोट सेंसिंग डाटा से पता चलता है कि कुल मिलाकर 1971 और 2021 के बीच ग्लेशियर पीछे हटे हैं। रिमोट सेंसिंग डेटा से पता चलता है कि 1971 और 1999 के बीच ग्लेशियर लगभग 2 एमए –1 की औसत से पीछे हटे हैं जबकि 1999 और 2021 के बीच ग्लेशियर के पीछे हटने की औसतन दर लगभग 12 एमए -1 रही। इसी तरह, दिन-प्रतिदिन की निगरानी के माध्यम से दर्ज किए गए क्षेत्र अवलोकनों से पता चलता है कि 2015 से 2021 के बीच 20.5 एमए -1 की उच्च दर से ग्लेशियर पीछे हटे हैं। क्षेत्र और उपग्रह-आधारित दोनों अवलोकनों से संकेत मिलता है कि ग्लेशियर मार्जिन की शांत प्रकृति और प्रोग्लेशियल झील के विकास ने पार्काचिक ग्लेशियर के पीछे हटने में बढ़ोतरी की है।