{"_id":"657119f8871fcb761309f635","slug":"research-crops-improved-with-pollination-due-to-flower-cultivation-income-of-small-farmers-will-increase-2023-12-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Research: फूलों की खेती से परागण संग बेहतर हुईं फसलें, शोधकर्ताओं का दावा, छोटे किसानों की आय में होगा इजाफा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Research: फूलों की खेती से परागण संग बेहतर हुईं फसलें, शोधकर्ताओं का दावा, छोटे किसानों की आय में होगा इजाफा
Thu, 07 Dec 2023 06:33 AM IST
यशोधन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 07 Dec 2023 06:33 AM IST
सार
अध्ययन के दौरान बगीचों और खेतों की मेड़ों में मोरिंगा के पेड़ों के साथ-साथ गेंदे के फूल और लाल चने की फसल लगाने से शोधकर्ताओं को फूलों पर आने वाले कीटों की बहुतायत और विविधता बढ़ाने में मदद मिली।
विज्ञापन
फूलों की खेती
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
खाद्य फसलों के साथ अगर फूलों की खेती की जाए तो न केवल परागण करने वाले जीवों को फायदा होगा बल्कि इससे फसलों की पैदावार और गुणवत्ता में भी सुधार आ सकता है। शोधकर्ताओं ने मोरिंगा यानी सहजन (ड्रमस्टिक) की फसल पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसे ‘सुपरफूड’ भी कहा जाता है, के बेहतर नतीजे सामने आए हैं।
विज्ञापन
अध्ययन के दौरान बगीचों और खेतों की मेड़ों में मोरिंगा के पेड़ों के साथ-साथ गेंदे के फूल और लाल चने की फसल लगाने से शोधकर्ताओं को फूलों पर आने वाले कीटों की बहुतायत और विविधता बढ़ाने में मदद मिली। इस दौरान फसल पर किसी भी तरह के कीटनाशक का छिड़काव भी नहीं किया गया।
विज्ञापन
इसके परिणामस्वरूप परागण में सुधार हुआ और फसल की पैदावार में भी वृद्धि देखी गई। एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन और यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के पारिस्थितिकीविदों के अध्ययन के नतीजे जर्नल ऑफ एप्लाइड इकोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं।
विज्ञापन
यूं मिली कामयाबी
शोधकर्ताओं ने तमिलनाडु के कन्नीवाड़ी क्षेत्र में मोरिंगा के 24 बागों में काम किया। 12 बगीचों में उन्होंने लाल चना और गेंदे के फूल लगाए। अन्य 12 बगीचों में कोई सह-फूल वाली फसल नहीं लगाई। इन बगीचों की तुलना करने पर पता चला जिन बगीचों में लाल चने और गेंदें के फूल लगाए गए थे वहां परागणकों की संख्या 50 फीसदी और उनकी विविधता 33 फीसदी अधिक थी। इन स्थानों पर फूलों पर आने वाले कीटों की संख्या भी अधिक थी। वहीं इसके साथ ही मोरिंगा की फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया। वहीं, बिना फूल वाले बगीचों में मोरिंगा में 30 फीसदी की कमी देखी गई।