फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Research claims- Human and machinery noise is becoming a threat to the existence of crickets

अध्ययन: इन्सानी शोर से झींगुरों के अस्तित्व पर संकट, शोध में दावा- संवाद नहीं कर पा रहे कीट

Sun, 12 May 2024 06:18 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 12 May 2024 06:18 AM IST
सार

कभी शाम ढलते ही वातावरण में कीटों की आवाज गूंजा करती थी, लेकिन बढ़ते इन्सानी शोर में यह आवाज कहीं दब सी गई है। अब इन झींगुरों ने आपस में संवाद करना बहुत कम कर दिया है। वातावरण में बढ़ते शोर की वजह से इस नन्हें जीव के प्रजनन और पैदा होने वाली संतानों पर असर पड़ रहा है।

विज्ञापन
Research claims- Human and machinery noise is becoming a threat to the existence of crickets
झींगुर (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

बढ़ता इन्सानी और मशीनी शोर झींगुरों के अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। कभी शाम ढलते ही वातावरण में कीटों की आवाज गूंजा करती थी, लेकिन बढ़ते इन्सानी शोर में यह आवाज कहीं दब सी गई है। अब इन झींगुरों ने आपस में संवाद करना बहुत कम कर दिया है। वातावरण में बढ़ते शोर की वजह से इस नन्हें जीव के प्रजनन और पैदा होने वाली संतानों पर असर पड़ रहा है। डेनवर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने झींगुरों पर इन्सानी शोर के बढ़ते प्रभावों का अध्ययन किया है। तीन वर्षों तक चले इस अध्ययन के नतीजे जर्नल बीएमसी इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में प्रकाशित हुए हैं। झींगुर की 900 प्रजातियों में से 100 अमेरिका में रहती हैं।  

विज्ञापन

अध्ययन में दिखा कि शोर के एक निर्धारित स्तर के बाद झींगुरों के वयस्क होने तक जीवित रहने की संभावना कम हो गई थी। इसके साथ ही मादा झींगुर कितने बच्चे पैदा करती है यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसने किशोरावस्था से वयस्क होने के बीच शोर के किस स्तर का सामना किया था। शोधकर्ताओं का कहना है कि आपस में संवाद के लिए ध्वनि पर निर्भर रहने वाले कीट, बढ़ते ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने झींगुरों का अध्ययन किया है। ये आमतौर पर शहरों में या उसके आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं, जहां ये आसानी से यातायात की वजह से होने वाले शोर के संपर्क में आ जाते हैं। अब धीरे-धीरे यह शोर कस्बों और गांवों तक पहुंच रहा है। 

विज्ञापन

संरक्षण जरूरी...शोध के मुताबिक, इन्सानी गतिविधियां इन नन्हें जीवों के विनाश की वजह बन रही हैं। पृथ्वी सिर्फ हमारा ही घर नहीं है। ये नन्हें जीव भी धरती का अभिन्न हिस्सा हैं, जिनके बिना जीवन के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती। इससे पहले बहुत देर हो जाए इन जीवों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को बढ़ावा देना जरूरी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed