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Hindi News ›   India News ›   Request for reconsideration of contempt proceedings against Prashant Bhushan in Supreme Court

प्रशांत भूषण के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई पर दोबारा विचार का अनुरोध

Mon, 27 Jul 2020 09:28 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 27 Jul 2020 09:28 PM IST
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Request for reconsideration of contempt proceedings against Prashant Bhushan in Supreme Court
प्रशांत भूषण (फाइल फोटो) - फोटो : फाइल

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन लोकूर और लेखिका अरुंधती राय सहित 130 से ज्यादा प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ शुरू की गई न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही पर फिर से विचार करने का अनुरोध सुप्रीम कोर्ट से किया है। 

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शीर्ष अदालत ने प्रशांत भूषण के न्यायपालिका के प्रति कथित अपमानजनक ट्वीट्स के मामले में उन्हें 22 जुलाई को स्वत: ही अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के बारे में नोटिस जारी किया था। न्यायालय ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से सहयोग करने का भी अनुरोध किया था।
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भूषण के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कुछ पूर्व न्यायाधीशों, पूर्व नौकरशाहों, पूर्व राजनयिकों के साथ ही चुनिंदा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि भूषण के खिलाफ शुरू की गई अवमानना की कार्यवाही इस तरह की आलोचना का गला दबाने का प्रयास लगता है।
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बयान में कहा गया है कि न्याय और निष्पक्षता के हित और शीर्ष अदालत की गरिमा बनाए रखने के लिए हम न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि वह प्रशांत भूषण के खिलफ स्वत: ही अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के फैसले पर फिर से विचार करे।

इस बयान पर न्यायमूर्ति लोकूर और राय के साथ ही पूर्व नौसेना अध्यक्ष एडमिरल रामदास, कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा, सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ओर पत्रकार पी साईनाथ ने भी हस्ताक्षर किए हैं।


बयान में कहा गया है कि प्रशांत भूषण लगातार समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं। उन्होंने अपना जीवन उन लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में लगा दिया जो सहजता से न्याय प्राप्त करने में सक्षम नहीं थे।

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