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PM मोदी की कूटनीति के आगे पस्त हुआ चीन और पाक, 10 आसियान देशों को एक साथ लाकर दिए कई संदेश

Fri, 26 Jan 2018 04:25 PM IST
Updated Fri, 26 Jan 2018 04:25 PM IST
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आसियान देश के नेताओं के साथ पीएम मोदी - फोटो : PMO
गणतंत्र दिवस के 70 सालों के इतिहास में यह पहली बार है जब देश में एक साथ दस देशों के प्रतिनिधियों को विशिष्ठ अतिथि बनाया गया है। इस महापर्व के मौके पर दस आसियान देशों के अध्यक्षों को एक साथ बुलाने को साधारण नहीं माना जा सकता है यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशनीति का एक कूटनीतिक हिस्सा है जिससे वह अपने दुश्मन देशों को एक बार फिर संदेश दे देना चाहते हैं कि संभलो। इससे पहले भी पीएम मोदी अपनी कूटनीति का नजारा पाकिस्तान और चीन को कई बार दिखा चुके हैं। पीएम मोदी प्रधानमंत्री पद संभालते ही अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को विशिष्ट अतिथि का न्यौता दिया था। 
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इससे पहले पीएम मोदी ने चीन को कड़ा संदेश देते हुए आसियान देशों के साथ दक्षिण चीन सागर विवाद पर आपस में प्रभावी तालमेल के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया साथ ही सभी देशों ने संवेदनशील समुद्री गलियारे में सागर सुरक्षा और नौपरिवहन की आजादी पर जोर दिया।  
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पाक द्वारा लगातार संघर्ष विराम के हो रहे उल्लंघन का करारा जवाब भारत ने कई बार दिया। भारत ने अपनी शक्ति और विश्व में अपनी हैसियत का नजारा तब भी दिखाया था जब पिछले साल पाक में होने जा रहे सार्क सम्मेलन का ऐसा बहिष्कार कि एक एक कर सभी सार्क देशों ने इसका बहिष्कार किया और आखिरकार पाक सम्मेलन नहीं कर सका था। अब बारी चीन को सबक सिखाने की है।
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चीन दोकलम विवाद पर लगातार भारत को आंखें तरेर रहा है वहीं दक्षिण चीन सागर विवाद भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में राजधानी में गुरुवार को  भारत-आसियान यादगार शिखर सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा, व्यापार और आपसी संपर्क पर अहम करार हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान देशों के छह राष्ट्राध्यक्षों से द्विपक्षीय बातचीत की

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इस सम्मेलन में आसियान के 10 देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने हिस्सा लिया जो गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आसियान देशों के छह राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने मेरीटाईम नेविगेशन की आजादी पर जोर देते हुए कहा कि भारत आसियान के कानून पर आधारित शासन के दर्शन को साझा करता है। इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ साझा युद्ध पर भी सहमति बनी।

विदेश  मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि इस बैठक के बाद भारत की लुक ईस्ट पॉलिसी और थाईलैंड की लुक वेस्ट पॉलिसी के अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे। मोदी ने थाईलैंड के अपने समकक्ष जनरल प्रयुत चान-ओ-चा के साथ व्यापार और सुरक्षा पर कई अहम करार किए। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सिंगापुर के प्रधानमंत्री सियान लूंग के साथ भी प्रधानमंत्री ने बातचीत की। सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि भारत के पास इन देशों के साथ जिम्मेदार सामरिक साझेदार बनने का अच्छा मौका है। 

इस मौके पर दसों आसियान देशों ने क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुगम बनाने और मजबूती देने के लिए आपसी सहयोग को बढ़ावा देने का फैसला किया। आसियान-इंडिया डायलॉग की 25वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए आयोजित शिखर सम्मेलन में इन देशों ने शिक्षा, युवा मामलों, आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता के लिए सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने का फैसला किया।
वहीं चीन भी भारत में आसियान देशों के प्रमुखों की भारत में मौजूदगी पर चीन का सधा हुआ बयान दिया। कल तक भारत को तमीज में रहने की सलाह देने वाले चीन ने कहा कि हमें आशा है कि यह सभी देश शांति, स्थिरता और क्षेत्र के विकास को बनाए रखने के लिए संयुक्त रूप से काम कर सकते हैं। 

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, ‘हम सभी इन उद्देश्यों के संबंध में एक रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं।’ इस दौरान उन्होंने भारतीय मीडिया की उन रिपोर्टों की भी आलोचना की जिनमें कहा जा रहा है कि आसिय न देशों के प्रमुखों को भारत द्वारा अपने गणतंत्र दिवस के अवसर पर न्यौता देने का उद्देश्य चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करना है। उन्होंने कहा, ‘मैं यह कहना चाहती हूं भारतीय मीडिया बहुत आश्वस्त नहीं है और वे हम पर भरोसा नहीं करते हैं।’

गौरतलब है कि चीन का आसियान के कुछ देशों के साथ दक्षिण चीन सागर में समुद्री सीमा को लेकर विवाद है। चीन दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। ऐसे में माना जा रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इन देश के नेताओं को आमंत्रित करना चीन के प्रभाव को कम करना है।
 
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