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गणतंत्र दिवस परेड में शामिल नहीं होगी पश्चिम बंगाल की झांकी, तृणमूल ने बताया- राज्य का अपमान

Thu, 02 Jan 2020 02:01 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Thu, 02 Jan 2020 02:01 PM IST
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Republic Day parade Centre Rejects West Bengal tableau propsal for parade on Rajpath, Mamta Banerjee
गणतंत्र दिवस - फोटो : जी पॉल

केंद्र सरकार द्वारा 26 जनवरी को राजपथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस परेड में पश्चिम बंगाल की झांकी को शामिल नहीं किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी दी कि बंगाल सरकार की झांकी का प्रस्ताव विशेषज्ञ समिति के पास दो बार भेजा गया। दूसरी बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद इसे खारिज कर दिया गया। तृणमूल कांग्रेस ने इसे पश्चिम बंगाल का अपमान बताया है। 

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इससे पहले भी साल 2018 में बंगाल की झांकी को परेड में शामिल नहीं किया गया था। इस साल परेड समारोह के लिए कुल 56 झांकियों के प्रस्ताव आए थे, जिनमें से 22 को चुना गया है। बता दें कि ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।
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मंत्रालय के मुताबिक, बंगाल की झांकी को पहले परेड की प्रक्रिया के हिसाब से चुना गया था। 2020 में होने वाले गणतंत्र दिवस परेड में कुल 56 झांकियों के प्रस्ताव आए थे। इन झांकियों के चुनाव के लिए विशेषज्ञ समिति में पांच दौर की बैठक की।
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मंत्रालय को राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से झांकियों के 32 और केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों से 24 प्रस्ताव मिले थे। जिसके बाद मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि पांच बैठकों के बाद उनमें से राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 16 और मंत्रालयों/विभागों के छह प्रस्ताव अंतिम रूप से गणतंत्र दिवस परेड 2020 के लिए चुने गया है।

विशेषज्ञ समिति अपनी सिफारिश रक्षा मंत्रालय को सौंपती है
गणतंत्र दिवस परेड के लिए राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं। झांकियों का चयन एक विशेष समिति द्वारा किया जाता है, जिसमें कला, संस्कृति, चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, वास्तुकला और नृत्यकला से संबंधित लोग शामिल होते हैं। यह समिति प्रस्तावों पर विचार कर अपनी सिफारिशों को रक्षा मंत्रालय को सौंपती है। समय की बाध्यता को देखते हुए सीमित संख्या में ही झांकियों का चयन होता है। 

2018 में भी नहीं शामिल हुई थी पश्चिम बंगाल की झांकी 
पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी को लेकर लगातार टकराव हो रहा है। माना जा रहा है कि गणतंत्र दिवस परेड में बंगाल की झांकी को शामिल ना किए जाने से दोनों सरकारों के बीच टकराव बढ़ सकता है। 2018 में भी बंगाल की झांकी परेड में शामिल नहीं की गई थी और उसके प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था। 

तृणमूल ने बताया राज्य का अपमान

गणतंत्र दिवस पर पश्चिम बंगाल की झांकी के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलने को लेकर गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर हमला बोला। तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ राज्य में प्रदर्शन के परिणामस्वरूप यह निर्णय लिया गया। उसने इसे राज्य और यहां की जनता का अपमान बताया।

पश्चिम बंगाल में संसदीय मामलों के मंत्री तापस रॉय ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा नीत सरकार ने राज्य के प्रति बदले की भावना पाल रखी है। उन्होंने कहा कि चूंकि पश्चिम बंगाल केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध कर रही है इसलिए उसके साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है।

इन आरोपों के जवाब में पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि झांकी का प्रस्ताव इसलिए खारिज हुआ क्योंकि राज्य सरकार ने प्रस्ताव पेश करने में नियमों एवं प्रक्रिया का पालन नहीं किया था। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को हर मुद्दे पर राजनीति करना बंद करना चाहिए।

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