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Republic day 2020: राष्ट्रपति कोविंद बोले, नए भारत के उत्थान का है अगला दशक
Sat, 25 Jan 2020 07:45 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Sat, 25 Jan 2020 07:45 PM IST
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश को किया संबोधित
- फोटो : President of India
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को 71वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर संबोधित करते हुए देश के युवाओं को उनकी अहमियत बताने का प्रयास किया। राष्ट्रपति ने कहा, 21वीं सदी का आगामी तीसरा दशक ‘नए भारत और भारतीयों की नई पीढ़ी के उत्थान का दशक’ साबित होगा। उन्होंने युवाओं को यह भी समझाने का प्रयास किया कोई भी गणतंत्र देश के लोगों में ‘वी द पीपुल्स’ की भावना से ही चलता है।
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राष्ट्रपति ने युवाओं की प्रशंसा करते हुए कहा, इस सदी में जन्मे युवा, बढ़चढ़ कर, राष्ट्रीय विचार प्रवाह में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। आज आधुनिक तकनीकों से जुड़े युवा दिमाग ज्यादा जानकार और अधिक आत्मविश्वासी हैं। मुझे, इन युवाओं में, एक उभरते हुए नए भारत की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा, अगली पीढ़ी हमारे राष्ट्र के मूल आदर्शों के प्रति ज्यादा प्रतिबद्ध है। हमारे युवाओं के लिए देश हमेशा पहले आता है। उनके साथ हम एक नए भारत के उत्थान के गवाह बन रहे हैं।
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उन्होंने 26 जनवरी की अहमियत को याद करते हुए कहा, आजादी से पहले भी 1930 से 1947 तक इस दिन को हम हर साल ‘पूर्ण स्वराज्य दिवस’ के तौर पर मनाते थे। उन्होंने कहा, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, आधुनिक भारत के तीन मुख्य अंग हैं। इनकी स्वायत्तता के साथ आंतरिक जुड़ाव बेहद अहम है। इसके बावजूद भारत की शक्ति इसके लोगों में ही निहित है। हमारे साथ, देशवासी हमारे सामूहिक भविष्य को तय करने की वास्तविक शक्ति का लाभ उठाते हैं। उन्होंने कहा, यदि हम राष्ट्रपिता के जीवन और उनके आदर्शों को अपने दिमाग में रखें तो हमारे लिए सांविधानिक मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध रहना बेहद आसान हो जाता है। ऐसा करके हम गांधीजी की 150वीं जयंती के अपने उत्सव में कुछ सार्थक आयाम जोड़ेंगे। यही विकास का उत्तम मार्ग है।
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उन्होंने आगामी ओलंपिक खेलों के लिए खिलाड़ियों को भी शुभकामना दी। उन्होंने कहा, इस बार हमारे खिलाड़ी इसमें नया अध्याय लिखेंगे। साथ ही राष्ट्रपति ने प्रवासी भारतीयों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीयों ने विदेशों में रहते हुए न केवल वहां की प्रगति में योगदान दिया, बल्कि अपनी भारतीय संस्कृति को भी सहेजा है।
देश के हर हिस्से के समान विकास को प्रतिबद्ध
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि सरकार देश के हर हिस्से के संपूर्ण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हो, पूर्वोत्तर के राज्य हों या हिंद महासागर में स्थित हमारे द्वीप समूह, सभी के लिए विकास योजनाएं बनाई गई हैं।
विकास के लिए आंतरिक सुरक्षा बेहद अहम
राष्ट्रपति ने कहा, देश के विकास के लिए मजबूत आंतरिक सुरक्षा बेहद है। इसके लिए सरकार विभिन्न ठोस कदम उठा रही है। साथ ही आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए नीति भी बनाई जा रही है। उन्होंने कहा, मैं हमारी सेनाओं, अर्द्धसैनिक बलों और आंतरिक सुरक्षा बलों के लिए जमकर प्रशंसा करता हूं। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने में उनका बलिदान, अद्वितीय साहस और अनुशासन की अमर गाथाएं पेश करता है।
इसरो को गगनयान अभियान के लिए दी शुभकामना
राष्ट्रपति ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को उसके गगनयान अभियान के लिए शुभकामना दी। उन्होंने इसरो की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, वे अब मिशन गगनयान की कामयाबी के लिए आगामी प्रयासों में जुटे हैं। पूरा देश उत्सुकता से भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान अभियान को इस साल गति मिलने की राह ताक रहा है।
उज्ज्वला से आयुष्मान भारत तक का किया जिक्र
राष्ट्रपति ने मोदी सरकार के विभिन्न योजनाओं की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि जन कल्याण के लिए सरकार ने कई अभियान चलाए हैं। खास यह है कि नागरिकों ने स्वेच्छा से इन अभियानों को लोकप्रिय जन आंदोलनों में बदला है। जनता की भागीदारी के कारण ‘स्वच्छ भारत अभियान’ ने बहुत ही कम समय में प्रभावशाली सफलता हासिल की है। भागीदारी की यही भावना रसोई गैस की सब्सिडी छोड़ने से लेकर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने तक सभी क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों में भी दिखाई देती है। राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ की उपलब्धियां गर्व करने योग्य हैं। अभी तक 8 करोड़ को इसका लाभ मिल चुका है। ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ के माध्यम से लगभग 14 करोड़ से अधिक किसानों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए हर साल 6 हजार रुपए की न्यूनतम आय मिली है। राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे विश्वास है कि ‘जल जीवन मिशन’ भी ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की तरह ही एक जन आंदोलन का रूप लेगा।
जीएसटी को सराहा, ई-नाम की तारीफ की
राष्ट्रपति ने जीएसटी की सराहना की। उन्होंने कहा, जीएसटी के लागू हो जाने से ‘एक देश, एक कर, एक बाजार’ की अवधारणा को साकार रूप मिल सका है। उन्होंने ‘ई-नाम’ योजना की भी तारीफ करते हुए कहा कि इससे ‘एक राष्ट्र के लिए एक बाजार’ की अवधारणा साकार होगी, जिसका लाभ किसानों को मिलेगा।
बाबा साहेब अंबेडकर के कथन से किया समापन
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन का समापन बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के एक कथन से किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने कहा था, हम लोकतंत्र को बनाए रखना चाहते हैं तो हमें सामाजिक आर्थिक उपायों के लिए सांविधानिक तरीके का ही इस्तेमाल करना होगा।