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Hindi News ›   India News ›   Republic Day: 18 courageous kids will be felicitated with National Bravery Awards 2018

वीरता पुरस्कार: 18 नन्हें मुन्नों की कहानी जानिए उनकी ही जुबानी

Fri, 19 Jan 2018 01:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 19 Jan 2018 01:23 PM IST
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Republic Day: 18 courageous kids will be felicitated with National Bravery Awards 2018
वीरता पुरस्कार
वो दिखने में भले ही छोटे है लेकिन उनके अदम्य साहस ने अच्छे अच्छों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। किसी ने अपने साहस के आगे सट्टा और जुआ  वालों को खदेड़ दिया तो कोई अपनी जान की परवाह न करते हुए तेंदुए से भिड़ गया और उसके जबड़े से मां-भाई को बचा लिया। इन साहसी बच्चों की कहानी यहीं खत्म नहीं होती है इनमें वो बच्चे भी शामिल हैं जिन्होंने दूसरों की जिंदगी को बचाने के लिए अपनी ईहलीला ही समाप्त कर डाली। ऐसे ही 18 बच्चों को देश गणतंत्र दिवस पर सलामी देगा।  
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ऐसी ही वीर बच्ची हैं नाजिया खान, उन्हें गैर कानूनी धंधे में जुड़े लोगों ने जान से मार डालने की धमकी भी दी इसके बावजूद जुए और सट्टेबाजी के गैरकानूनी धंधे को बंद कराने में जुटी रही उत्तर प्रदेश के आगरा की 18 वर्षीय नाजिया खान को शीर्ष वीरता सम्मान भारत अवार्ड से नवाजा जाएगा। अदम्य साहस के भरे बच्चों में  7 लड़कियां और 11 लड़के शामिल हैं। तीन बच्चों को मरणोपरांत पुरस्कार दिया जाएगा। सम्मानित बच्चों में सबसे छोटी ओडिशा की छह साल आठ महीने की ममता दलाई है जो अपनी बहन को बचाने के लिए मगरमच्छ से भिड़ गई और उसे भगाकर ही मानी। 
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भारतीय बाल कल्याण परिषद की अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने बताया कि गीता चोपड़ा अवार्ड 14 साल की स्वर्गीय कुमार नेत्रावती एम चव्हान को दिया जा रहा है उसने अपने जीवन की परवाह किए बिना दो लोगों को डूबने से बचाया था लेकिन खुद नहीं बच सकी। 
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वहीं वीरता में अदम्य साहस का परिचय देने वाले वीर बच्चों में संजय चोपड़ा पुरस्कार अमृतसर के 17 वर्षीय करणबीर को मिला है। उसने नहर में गिरी स्कूल बस के डूबने के बाद अपनी जान बचाने के बजाए 15 बच्चों को बचाया। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के पंकज सेमवाल ने तेंदुए से अपनी मां और भाई की जान बचाई थी। बापू गैधानी अवार्ड तीन लोगों छत्तीसगढ़ की लक्ष्मी यादव, ओडिशा सात वर्षीय ममता दलाई और केरल के मास्टर सेबेस्टियन विसेंट को दिया गया है।


इन वीर बच्चों का सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक कार्यक्रम में 24 जनवरी को करेंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति भवन में इन बच्चों के लिए रिसेप्शन की मेजबानी करेंगे। ये सभी बच्चे 26 जनवरी को निकलने वाली परेड में भी शामिल होंगे।  यह वीरता पुरस्कार 6 से 18 साल की उम्र के बच्चों को हर साल दिया जाता है। इन वीर बच्चों को मेघालय के बेत्शवाजॉन पीनलांग, नगालैंड की मानशा एन., एन. शेंगपॉन कोनयक, योकनेई, चिंगाई वांग्सा, गुजरात के समृद्धि सुशील शर्मा, मिजोरम के जोनुनलुआंगा और एफ. लालछंदमा, महाराष्ट्र के नदाफ एजाज अब्दुल राउफ, मणिपुर से लोकरापाम राजेश्वरी चानू, ओडिशा से पंकज कुमार महंत शामिल हैं। 
 

इन वीर बच्चों के आगे नतमस्तक है देश

Republic Day: 18 courageous kids will be felicitated with National Bravery Awards 2018
वीरता पुरस्कार
आग लगे घर में घुसपर छोटे भाई को निकाला
मेघालय के बेट्श्वाजॉन पेनलांग ने अपने घर में आग लगने के बाद अपने तीन साल के बेटे को अंदर जाकर निकाला। वह खुद भी उस समय करीब 13 साल के थे। जब आग लगी तो वह घर के बाहर थे मां बाप बाहर थे। घर में सिर्फ तीन साल का बच्चा था। मगर पेनलांग ने साहस दिखाकर घर में गया और भाई को निकालकर ले आया। 

रेलवे ट्रैक पर फंसे दोस्त को बचाया 
सेबासटियन केरल के रहने वाले है। वह अपने दोस्त के साथ साइकिल से स्कूल जा रहे थे। रास्ते में रेलवे क्रांसिंग पर उसका दोस्ता रेलवे ट्रैक पर फंसकर गिर गया। उधर से ट्रेन आ रही थी। सेबासटियन ने बिना देर किए अपने दोस्त को तुरंत ट्रैक से बाहर हटाया फिर खुद को कूदकर वहां से बचाया। 
बदमाशों ने किया किडनैप बचकर निकली फिर पकड़वाया 
रायपुर की रहने वाली लक्ष्मी ने खुद को बदमाशों के चंगुल से बचाया बल्कि उन्हें गिरफ्तार भी करवाया। लक्ष्मी यादव ने बताया कि वह अपने एक दोस्त के साथ सड़क पर बात कर रही थी। तभी तीन युवक आए मेरे दोस्त की बाइक छीन और मुझे जबरन उसपर बिठाकर एक सुनसान इलाके में ले गए। पहले तो मै चली गई। उनका इरादा नेक नहीं था। मैने पहले उनके बाइक की चाभी निकालकर झाडिय़ों में फेका जिससे वह मेरा पीछा आसानी से ना कर पाएं फिर वहां भागी। सीधे थाने में जाकर सारी घटना बताई तो पुलिस की मदद से उन्हें गिरफ्तार करवाया। लक्ष्मी ने कहा कि वह बड़ी होकर पुलिस में ही जाना चाहती है। 

पिता को अपने ही बच्चों की हत्या की कोशिश को किया नाकाम
नागालैंड की यह घटना 7 अगस्त 2016 की है। तीन व छह साल के दो बच्चे अपने मां की मौत के मनशा एन. की देखरेख में रहते थे। एक दिन बच्चों के पिता ने दोनों बच्चों को मारने की कोशिश की। मनशा एन. को जैसे पता लगा उन्होंने उसे बचाकर वहां से निकाला फिर बच्चों के मामा जो बगल में रहते है उन्हें बुलाकर बच्चों को बताया। बच्चों के पिता ने धारदार हथियार से हमले की कोशिश की लेकिन मनशा एन और बच्चों के मामला एन. शेंगपॉन कोनयक और योकनेई ने मिलकर इसे नाकाम किया। तीनों को वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया। 

चोर की कोशिश की नाकाम 
गुजरात की समृद्दिध सुशील शर्मा ने अपने घर पर अकेली थी। एक नकाबपोश आया और नौकरानी के बारे में पूछा। फिर पानी मांगा मना करने पर चाकू समृद्दिध के गले पर रख दिया। मगर समृद्दिध डरी नहीं और चाकू को हाथ से पकड़ लिया। चोर को अंत में भागना पड़ा। हालांकि इसमें समृद्दिध का हाथ बुरी तरह घायल हुआ। तीन बार सर्जरी हो चुकी है अभी एक बार और किया जाना है। समृद्धि डॉक्टर बनना चाहती है। इसकी तैयारी में जुटी है। उनकी शिक्षिका मां को भी अपनी बेटी पर नाज है। 

जलते घर से बुजुर्ग को बचाया
नागालैंड के चिंगई वांग्सा ने अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए एक 74 साल के बुजुर्ग को आग लगे हुए घर से जिंदा बाहर निकाला। घटना 4 सितंबर 2016 की है। गांव में सब चर्च में गए थे तभी एक घर में आग लगी थी। उस समय बुजुर्ग घर में अकेले थे। 


 

पिता को भालू के हमले से बचाया

Republic Day: 18 courageous kids will be felicitated with National Bravery Awards 2018
bravery award
पिता को भालू के हमले से बचाया
मिजोरम के सरचिप जिले के रहने वाले जोनुनतुआंगा अपने पिता के साथ एक छोटी सी नदी पर बने पुल को क्रास कर रहे थे। उसी समय नदी में कुछ हलचल हुई तो उनके पिता देखने चले गए। उसी दौरान एक भालू ने उनपर हमला कर घायल कर दिया। जोनुनतुआंगा ने यह देखकर एक धारदार हथियार लेकर भालू का मुकाबला किया उसे वहां से भगा दिया। पिता को तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे। उन्हें भालू से बचा लिया। 

डूबती लड़कियों को बचाया
महाराष्ट्र के नदाफ इजाज अब्दुल रॉफ जिला नानजेड़ के रहने वाले है। वहां एक जलाशय पर कुछ लड़कियां गई थी। अचानक उनमें से एक लड़की जलाशय में गिर गई। उसे बचाने को बाकी लड़कियां अंदर कूद गई। यह देखकर अब्दुल रॉफ कुछ लोगों के साथ जलाशय में कूदा। बाकी लोग 20 फुट गहरे पानी में जाने से डर गए मगर अब्दुल उन्हें ढूढ़ता रहा। चार लड़कियों में से दो को बचाने में सफल भी रहा गर दो की मौत हो गई। 

बच्चे ने डूबती महिलाओं को बचाया
उड़ीसा के केंदुझर जिले के रहने वाले पंकज कुमार ने डूब रही तीन महिलाओं को बचाया। तीनों महिलाएं वहां स्थित बैतारनी नदी पर गई हुई थी। अधिकतर ग्रामीण वहां स्नान करने जाते थे। उस समय बारिश से उसमें पानी ज्यादा था। तीन महिलाएं स्नान के दौरान डूबने लगी। यह देखकर पंकज कुमार माहंत ने उन्हें बचाने के लिए छलांग लगा दी। अपने से उम्र में लगभग दोगूनी ज्यादा उम्र की बड़ी महिलाएं को एक-एक कर बाहर निकाला और सबको बचा लिया। 
 
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