तैयारी: इलाज के दौरान दवा के प्रतिकूल असर पर देनी होगी रिपोर्ट, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने दिया आदेश
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की ओर से जारी आदेश में सभी मेडिकल कॉलेजों को इंडियन फार्माकोपिया कमीशन में पंजीयन कराने के लिए कहा गया है।
विस्तार
जल्द ही देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में भी प्रतिकूल औषधि निगरानी केंद्रों की स्थापना होगी। इसके जरिए दवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इन कॉलेजों के अस्पतालों में भर्ती मरीज को इलाज के दौरान अगर किसी दवा का प्रतिकूल असर दिखाई दे रहा है तो तत्काल इसकी रिपोर्ट इंडियन फार्माकोपिया कमीशन को देनी होगी।
इस मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की ओर से जारी आदेश में सभी मेडिकल कॉलेजों को इंडियन फार्माकोपिया कमीशन में पंजीयन कराने के लिए कहा गया है। मेडिकल कॉलेज के निदेशकों को लिखे पत्र में एनएमसी सचिव डॉ. पुलकेश कुमार ने कहा है कि बीते वर्ष 14 अक्तूबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में इंडियन फार्माकोपिया कमीशन की वार्षिक बैठक हुई थी, जिसमें यह तय हुआ था कि सभी मेडिकल कॉलेजों को भी कमीशन से जोड़ा जाए।
- 652 प्रतिकूल औषधि निगरानी केंद्रों का अब तक देश में हुआ है गठन।
- सरकार ने सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को इंडियन फार्माकोपिया कमीशन से जोड़ने का लिया फैसला।
राष्ट्रीय समन्वय केंद्र के रूप में कार्य कर रहा फार्माकोपिया आयोग
दरअसल, मरीजों को दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर नजर रखने और स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के अधीन भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) एक राष्ट्रीय समन्वय केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है, जो प्रतिकूल दवा का संग्रह, विश्लेषण और उनकी निगरानी रखता है।
- देश में अभी तक 652 प्रतिकूल औषधि निगरानी केंद्रों की स्थापना हुई है। हालांकि सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के आयोग से जुड़ने के बाद इन केंद्रों की संख्या बढ़कर एक हजार से अधिक होगी।
घटना पर जल्दी कार्रवाई दवा पर जांच भी होगी
प्रतिकूल औषधि निगरानी केंद्रों की स्थापना को लेकर सीडीएससीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के साथ साथ उनके इलाज में इस्तेमाल दवाएं व अन्य चिकित्सा उपकरणों का निरीक्षण होना भी बहुत जरूरी है। मौजूदा समय में, देश के मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों में सबसे अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यहां प्रतिकूल औषधि निगरानी केंद्र होने से काफी लाभ मिलेगा। किसी भी घटना पर जल्द ही एक्शन लेने में मदद मिलेगी और उक्त दवा के खिलाफ जांच भी होगी।