चिंताजनक: देश में तेजी से बढ़ता जा रहा है जलवायु परिवर्तन का दायरा; 51 जिलों में भीषण बाढ़-91 में सूखे का खतरा
रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ से संबंधित खतरे के विपरीत सूखे का खतरा पूरे देश में समान रूप से फैला हुआ है। सूखे के भारी खतरे वाली श्रेणी के अंतर्गत आने वाले 65 जिले 22 राज्यों में स्थित हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, असम, केरल, नागालैंड और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।
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जलवायु परिवर्तन की वजह से देश के 51 जिलों में भीषण बाढ़ और 91 जिलों में भयंकर सूखे का खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा अन्य 118 जिले उच्च बाढ़ और 91 जिले उच्च सूखे की जद में हैं। 11 जिले बाढ़ और सूखे दोनों के भयंकर खतरे में हैं। इनमें पटना, केरल में अलपुझा, असम में चराईदेव, डिब्रूगढ़, शिवसागर, दक्षिण सलमारा-मनकाचर, गोलाघाट, ओडिशा में केंद्रपाड़ा, पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद, नादिया और उत्तर दिनाजपुर शामिल हैं।
यह जानकारी सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पालिसी (सीएसटीईपी), गुवाहाटी और मंडी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों द्वारा तैयार की गई जलवायु जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट में दी गई है।
22 राज्यों के 65 जिले हो सकते हैं प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ से संबंधित खतरे के विपरीत सूखे का खतरा पूरे देश में समान रूप से फैला हुआ है। सूखे के भारी खतरे वाली श्रेणी के अंतर्गत आने वाले 65 जिले 22 राज्यों में स्थित हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, असम, केरल, नागालैंड और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। बाढ़ और सूखे से ज्यादा प्रभावित जिलों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। पहले 110 जिले सूखे से बाढ़ की तरफ गए थे लेकिन अब सूखे से ज्यादा बाढ़ झेलने वाले जिलों की संख्या 149 हो गई है।
4,000 तहसीलों में बारिश में दस फीसदी वृद्धि
देश की 4,000 से अधिक तहसीलों में से लगभग 55 फीसदी में पिछले दशक यानी 2012-22 तक जलवायु आधार रेखा (1982-2011) की तुलना में मानसूनी बारिश में 10 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। इस वृद्धि का अधिकांश हिस्सा राजस्थान, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों के पारंपरिक रूप से सूखे इलाकों में दर्ज किया गया है।
बिहार, महाराष्ट्र समेत पांच राज्यों में सूखा और बाढ़ दोनों का जोखिम
बिहार, असम, झारखंड, उड़ीसा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ज्यादातर ऐसे जिले हैं जिनमें सूखा और बाढ़ दोनों का खतरा है। जिन जिलों में भयंकर सूखा पड़ने और उच्च सूखे का जोखिम है उनमें अधिकतर बिहार, असम, झारखंड, उड़ीसा और महाराष्ट्र के अंतर्गत आते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उड़ीसा और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशील हैं। इस कारण इन क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ और सूखे जैसी घटनाएं बढ़ने की संभावना है।
जनसंख्या कम तो खतरा भी कम
रिपोर्ट केअनुसार कुछ जिलों में यदि जनसंख्या बहुत कम है तो खतरा भी कम है। यदि जिले में बेहतर मुकाबला करने वाले तंत्र हैं जैसे कि सूखे के खतरे से निपटने के लिए सिंचाई के साधन, किसानों के लिए फसल बीमा, 100 दिन के काम के लिए मनरेगा तो वे जिले कम असुरक्षित होंगे और इसलिए वहां रहने वाले लोगों खतरा कम होगा। मैदानी इलाकों में रहने वाले लोग बाढ़ के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं। इमारतों की खराब डिजाइन और घटिया निर्माण सामग्री भी परेशानी बढ़ाती है। इसके अलावा सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा में कमी, सार्वजनिक सूचना और जागरूकता की कमी भी खतरे में इजाफा करते हैं।