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Report: 100 में 99 पैदल यात्रियों पर दुर्घटना का जोखिम, वाहन गुजरने का इंतजार करते हैं 12 फीसदी पैदल यात्री
Tue, 16 May 2023 06:34 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 16 May 2023 06:34 AM IST
सार
बॉश की रिपोर्ट के अनुसार साल 2021 में हादसों से 29,200 पैदल यात्रियों की मौत हुई। जापान और यूरोपीय संघ के 27 देशों में मारे गए कुल पैदल यात्रियों की संख्या इससे भी कम है। देश में उसी वर्ष 60 हजार पैदल यात्री घायल भी हुए।
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पैदल यात्रियों पर दुर्घटना का जोखिम (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत में हर 100 पैदल यात्रियों में 99 पर सड़क हादसे का जोखिम है। यहां सड़क पार करते वक्त कई पैदल यात्रियों को बीच सड़क रुकना और वाहनों के गुजरने का इंतजार करना होता है। पश्चिमी देशों में कोई पैदल यात्री सड़क पार करता दिखता है तो वाहन चालक अपनी गाड़ी रोक उसके सड़क पार करने का इंतजार करते हैं, लेकिन भारत में पैदल यात्री को खुद रुकना होता है।
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इस आचरण को सामने रख जर्मन इंजीनियरिंग व टेक कंपनी ने पैदल यात्रियों के लिए बढ़ते सड़क हादसों के जोखिम पर रिपोर्ट दी है। बॉश की रिपोर्ट के अनुसार साल 2021 में हादसों से 29,200 पैदल यात्रियों की मौत हुई। जापान और यूरोपीय संघ के 27 देशों में मारे गए कुल पैदल यात्रियों की संख्या इससे भी कम है। देश में उसी वर्ष 60 हजार पैदल यात्री घायल भी हुए।
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6300 राहगीरों के डाटा पर तैयार की रिपोर्ट
यह रिपोर्ट 6,300 सड़क हादसों के डाटाबेस पर आधारित है, जिन्हें रोड एक्सीडेंट सैंपलिंग सिस्टम फॉर इंडिया (रासी) ने दर्ज किया। रिपोर्ट के अनुसार गांवों में पैदल यात्री से जुड़े हर दूसरे हादसे में औसतन 1 मौत हो रही है, शहरी क्षेत्रों में यह संख्या कम है। बॉश इंडिया के अधिकारी गिरिकुमार कुमारेश के अनुसार यह हादसे रोकने के लिए बेहतर सड़क सुरक्षा प्रदान करनी होगी।
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ये सिफारिशें दीं
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश हादसों में तीनों वजहें मिले-जुले रूप से मौजूद रहीं। 52 फीसदी हादसे दिन में हो रहे हैं, यानी लापरवाही अहम वजह है। इन सभी के बारे में विचार करते हुए समाधान निकालने होंगे। कुमारेश के अनुसार 12 प्रतिशत पैदल यात्री सड़क के बीच में रुक रहे हैं, जिससे हादसे बढ़ते हैं। इसे भी रोकना होगा।