फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Report: More than one crore children born between 2008 and 2017 risk of gastric cancer

शोध: 2008-17 के बीच जन्मे 1.56 करोड़ बच्चों में गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा, भारत-चीन में 65 लाख केस मिलने के आसार

Tue, 22 Jul 2025 07:09 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 22 Jul 2025 07:09 AM IST
सार

शोध के अनुसार एशिया पेट के कैंसर से सर्वाधिक प्रभावित महाद्वीप बनने जा रहा है। अकेले भारत और चीन में अगले कुछ दशकों में 65 लाख से ज्यादा नए केस मिलने की आशंका है। पूरे एशिया में यह संख्या 1.06 करोड़ तक पहुंच सकती है।  

विज्ञापन
Report: More than one crore children born between 2008 and 2017 risk of gastric cancer
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और बिगड़ती जीवनशैली के दौर में पेट के कैंसर जैसा एक अदृश्य खतरा हमारे शरीर में जन्म ले रहा है। नेचर मेडिसिन में प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार 2008 से 2017 के बीच जन्मे करीब 1.56 करोड़ युवाओं को भविष्य में गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा है और इसकी जड़ में छिपा है एक बेहद आम लेकिन खतरनाक बैक्टीरिया हेलिकोबैक्टर पाइलोरी।

विज्ञापन


इस शोध के अनुसार एशिया पेट के कैंसर से सर्वाधिक प्रभावित महाद्वीप बनने जा रहा है। अकेले भारत और चीन में अगले कुछ दशकों में 65 लाख से ज्यादा नए केस मिलने की आशंका है। पूरे एशिया में यह संख्या 1.06 करोड़ तक पहुंच सकती है।  अफ्रीका जैसे महाद्वीप, जहां वर्तमान में इस कैंसर के मामले तुलनात्मक रूप से कम हैं, वहां भी 2022 की तुलना में यह खतरा बहुत तेजी से बढ़ने वाला है। हेलिकोबैक्टर पाइलोरी एक घुमावदार आकार का सूक्ष्मजीव है जो पेट की भीतरी परत में छिपकर सूजन व कोशिकीय क्षरण का कारण बनता है। आमतौर पर यह संक्रमण बचपन में ही हो जाता है और वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बना रहता है। अधिकतर लोग इसे गैस, अपच, हल्की जलन या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि अंदर ही अंदर यह पेट की परत को अल्सर और अंततः कैंसर तक पहुंचा देता है।  
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Jagdeep Dhankhar: बंगाल सरकार से टकराव के चलते सुर्खियों में रहे धनखड़, शीर्ष कोर्ट के फैसले की भी की आलोचना
विज्ञापन
विज्ञापन


कैसे पहचानें और बचाव करें
शोधकर्ता वैज्ञानिकों के अनुसार इसके लक्षण पहचान कर इससे बचाव करना और समय पर उपचार करना बेहद आसान है। सरकारों को अपने तमाम स्वास्थ्य केंद्रों, ग्राम पंचायतों और प्रचार माध्यमों के जरिए लोगों को जागरूक करना चाहिए।


ये भी पढ़ें: Bangladesh: फिर से सत्ता में आ सकती है अवामी लीग-हसीना, लेकिन सुधारने होंगे तौर-तरीके; जानिये किसने किया दावा

75% मामले टाले जा सकते हैं जांच हो तो
रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली संभावना जताई गई है कि अगर हेलिकोबैक्टर पाइलोरी की बड़े पैमाने पर जांच और इलाज की व्यवस्था की जाए तो पेट के कैंसर के अनुमानित मामलों में 75 फीसदी तक की कमी लाई जा सकती है। यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने इसे प्राथमिक  स्वास्थ्य एजेंडे में शामिल करने  की सिफारिश की है।

  • अभी तक गैस्ट्रिक कैंसर वैश्विक स्तर पर कैंसर से  होने वाली मौतों का पांचवां सबसे बड़ा कारण है।
  • इसके बावजूद हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण की पहचान और रोकथाम के प्रयास सीमित हैं। खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में जहां संसाधनों की कमी के कारण कैंसर संबंधित आंकड़े अधूरे और अनुसंधान की दृष्टि से कमजोर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed