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रिपोर्ट में दावा: ऑटोमेशन बढ़ने के बावजूद आईटी क्षेत्र में बढ़ेंगी नौकरियां
Tue, 05 Feb 2019 04:51 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Tue, 05 Feb 2019 04:51 AM IST
सार
- 76 फीसदी भारतीय नियोक्ता कर्मियों की संख्या बढ़ाने या बनाए रखने पर सहमत
- 44 देशों के 19,000 हजार नियोक्ताओं का सर्वे कर तैयार की गई रिपोर्ट
- नए कौशल बढ़ने से समाप्त होगा मानव बनाम मशीन का अंतर
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विस्तार
आईटी कंपनियों में ऑटोमेशन के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण लोगों में नौकरी जाने की चिंता के बीच 76 फीसदी भारतीय नियोक्ताओं का कहना है कि ऑटोमेशन (स्वचालन) की स्वीकार्यता बढ़ने के बावजूद वे कर्मचारियों की संख्या बढ़ाएंगे या बनाए रखेंगे। वहीं, वैश्विक स्तर पर 87 फीसदी नियोक्ताओं ने भी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने या बनाए रखने की योजना बनाई है।
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मैनपावरग्रुप की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटलीकरण करने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ रही हैं। यह वृद्धि रोजगार के अधिक और नए अवसर पैदा कर रही है। इसमें आगे कहा गया है कि वैसे संगठन जो पहले से ही कार्यों को स्वाचालित करने के साथ अपने डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ा रहे हैं, वे कर्मचारियों को बढ़ाने के लिए सबसे अधिक आश्वस्त हैं।
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मशीनों के साथ एकीकृत होना जरूरत
मैनपावरग्रुप ने अगले दो साल में रोजगार में वृद्धि पर ऑटोमेशन के प्रभाव को लेकर 44 देशों के 19,000 नियोक्ताओं का सर्वेक्षण किया है। इसमें सामने आया कि वैश्विक स्तर पर 87 फीसदी और भारत में 76 फीसदी नियोक्ता ऑटोमेशन के बावजूद कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने या बनाए रखना चाहते हैं। ग्रुप के इंडिया के प्रेसिडेंट (प्रयोग) मनमीत सिंह का कहना है कि कार्यबल में रोबोट की संख्या अधिक-से-अधिक बढ़ाई जा रही है। ऐसे में मार्गदर्शक (लीडर) होने के नाते हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मानव मशीनों के साथ एकीकृत हों क्योंकि यह समय की आवश्यकता है।
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सहकर्मी बन सकेंगे मानव और मशीन
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वैश्विक प्रतिभा की कमी 12 साल के उच्चस्तर पर है। नए कौशल उतनी ही तेजी से सामने आ रहे हैं, जितनी तेजी से अन्य गायब हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 84 फीसदी कंपनियों ने 2020 तक अपने कार्यबल को नए कौशल से लैस करने की योजना बनाई है, जो 2011 में केवल 21 फीसदी थी। वहीं, सिंह का कहना है कि नए कौशल बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने से मानव बनाम मशीन का अंतर समाप्त हो जाएगा। इससे मानव और मशीनों को एक ही मंच पर सहकर्मियों के रूप में साथ लाया जा सकेगा।
नौकरी से निकाले गए सवा सौ रोबोट
जापान के ‘क्यू शू द्वीप’ में ‘हेन-ना’ होटल ने काम पर रखे 243 में से 123 रोबोट को नौकरी से निकाल दिया है। ये रोबोट होटल में आने वाले ग्राहकों का काम आसान करने की बजाए उनके लिए मुश्किलें पैदा कर रहे थे। ‘चुरी’ नाम के ये रोबोट होटल के हर कमरे में यह सोचकर रखे गए थे कि स्थानीय जगह को लेकर ये होटल के ग्राहकों के सवालों का जवाब दे पाएं। लेकिन ये ऐसा करने में असफल रहे। साथ ही ग्राहकों को कमरे में चैन से सोने भी नहीं दे रहे थे।
दरअसल, होटल के कमरे में ग्राहक गहरी नींद में अगर खर्राटे भरने लगते तो उनके खर्राटों की आवाज सुनकर ये रोबोट उन्हें तब तक सोने नहीं देते थे, जब तक कि ग्राहक खुद उसका जवाब नहीं दे देते। इससे वे नाराज होने लगे। इसके अलावा डायनासोर जैसे दिखने वाले दो रोबोट को भी हटाया गया है। इन्हें होटल चेक-इन पर रखा गया था। ये ग्राहकों के पासपोर्ट या अन्य दस्तावेजों की फोटोकॉपी जैसा काम भी नहीं कर पाते थे। वहीं, दो रोबोट को ग्राहकों का सामान पहुंचाने के लिए रखा गया था, लेकिन ये होटल के 100 में से सिर्फ 24 कमरों तक ही पहुंच पाते थे। साथ ही बारिश या बर्फबारी में ये बंद पड़ जाते थे।