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रिपोर्ट : आर्थिक वृद्धि को पटरी पर लाने के लिए कोरोना टीकाकरण की गति को तेज करना जरूरी
Wed, 09 Jun 2021 11:59 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 09 Jun 2021 11:59 PM IST
सार
- रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया कि आर्थिक सुधार की गति को फिर से हासिल करने के लिए टीकाकरण की गति और अभियान को तेज करना महत्वपूर्ण है
- रिपोर्ट में मंत्रालय ने कहा कि लोगों की जान और आजीविका बचाने के लिए स्वास्थ ढांचे में मजबूती, टीकाकरण में तेजी, वायरस के अलग प्रारूपों पर शोध जरूरी
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अर्थव्यवस्था
- फोटो : pixabay
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विस्तार
वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जारी अपनी मासिक आर्थिक रिपोर्ट में कहा कि आर्थिक वृद्धि की गति फिर से बढ़ाने के लिए कोविड-19 टीकाकरण की गति को तेज करना और बड़े पैमाने चलाना बहुत महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर की रफ़्तार धीमी पड़ने, टीकाकरण अभियान के तेजी से सुधार और केंद्रीय बजट में नियोजित राजकोषीय उपायों से आने वाली तिमाहियों में निवेश प्रक्रिया बढ़ेगी।
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रिपोर्ट में कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रभाव के बारे में कहा गया है कि इसका मौजूदा तिमाही में विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र पर प्रभाव हल्का रह सकता है। रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया कि आर्थिक सुधार की गति को फिर से हासिल करने के लिए टीकाकरण की गति और अभियान को तेज करना महत्वपूर्ण है।
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रिपोर्ट में मंत्रालय ने कहा कि लोगों की जान और आजीविका बचाने के लिए स्वास्थ ढांचे में मजबूती, टीकाकरण में तेजी, वायरस के अलग प्रारूपों पर शोध, सोच विचार और पहले से भांपते हुये प्रतिबन्ध लगाना और कोविड19 से संबंधित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना बहुत जरूरी है।
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रिपोर्ट के अनुसार मई के दूसरे पखवाड़े के दौरान बिजली की खपत, ई-वे बिल और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश प्रवाह जैसे वास्तविक और वित्तीय क्षेत्रों में मामूली वृद्धि देखी गई।
देश में कोविड-19 की दूसरी लहर की रफ़्तार पिछले कुछ दिनों में धीमी हुई है। पिछले कुछ दिनों से सक्रिय मामलों में भी लगातार कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार आठ मई के आस-पास कोविड की दूसरी लहर अपने चरम पर थी उसके बाद इसमें कमी आई है।
रिपोर्ट में यह भी देखा गया कि देश में वित्त 2020-21 की दूसरी छमाही के दौरान अर्थव्यवस्था में 'वी आकार’ यानी तेजी से सुधार देखने को मिला।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था के 0.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 1.6 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से सालाना जीडीपी में पहले के आठ प्रतिशत गिरावट आने के मुकाबले दूसरी अग्रिम अनुमान में यह सुधरकर 7.3 प्रतिशत गिरावट रह गई।