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Farm Laws: शिवसेना ने भाजपा पर साधा निशाना, कहा- तीन कृषि कानूनों की वापसी 'सत्ता के अहंकार की हार'

Sat, 20 Nov 2021 12:05 PM IST
मुकेश कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sat, 20 Nov 2021 12:05 PM IST
सार

शिवसेना ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की केंद्र की घोषणा को 'सत्ता के अहंकार की हार' करार दिया। शिवसेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश और पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा को चुनाव को देखते हुए ऐसा किया गया।

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Repeal of farm laws defeat of arrogance of power, announcement made with eye on polls: Shiv Sena
Farm Laws - फोटो : ANI

विस्तार

तीन कृषि कानूनों की वापसी पर शिवसेना ने शनिवार को भाजपा पर साधा निशाना साधा। शिवसेना ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की केंद्र की घोषणा को 'सत्ता के अहंकार की हार' करार दिया। शिवसेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश और पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा को चुनाव को देखते हुए ऐसा किया गया, क्योंकि भाजपा को हार का डर था। शिवसेना ने कहा, 'केंद्र सरकार ने विपक्ष की आवाज को दबा दिया और तीन कृषि विधेयकों को संसद में पारित कर दिया। केंद्र ने किसानों के विरोध को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। विरोध स्थल पर पानी और बिजली की आपूर्ति बंद कर दी गई थी। किसानों को खालिस्तानी, पाकिस्तानी और आतंकवादी तक कहा गया।'

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शिवसेना का भाजपा पर तंज- अहंकार अंततः कुचला जाता है
शिवसेना ने आगे कहा कि इन सबके बावजूद, किसान निजी क्षेत्र और पूंजीपतियों के हित में कानूनों को वापस लेने की अपनी मांग से नहीं हटे। विरोध के दौरान 550 किसानों की मौत हो गई। एक केंद्रीय मंत्री के बेटे ने लखीमपुर खीरी में किसानों को अपने वाहन के नीचे कुचल दिया, लेकिन पीएम मोदी ने उनकी मौत पर शोक भी नहीं किया। मगर किसान अभी अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे। महाराष्ट्र में सत्ताधारी दल ने कहा ने कहा कि उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार को देखते हुए मोदी सरकार ने कानूनों को रद्द करने का फैसला किया। 'महाभारत' और 'रामायण' हमें सिखाते हैं कि अहंकार अंततः कुचला जाता है, लेकिन ऐसा लगता है कि नकली हिंदुत्ववादी इसे भूल गए हैं और रावण की तरह सच्चाई और न्याय पर हमला किया है।  यह किसानों की एकता की जीत है।
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अन्याय और सत्तावाद के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह
शिवसेना ने लोगों से अन्याय और सत्तावाद के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कम से कम भविष्य में, केंद्र को इस तरह के कानून लाने से पहले अहंकार को दूर करना चाहिए और देश के कल्याण के लिए विपक्षी दलों को विश्वास में लेना चाहिए। बता दें कि शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा की। पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार किसानों के कल्याण के लिए देश के कृषि जगत के हित में पूर्ण समर्थन भाव से, नेक नियत से ये कानून लेकर आई थी ताकि छोटे किसानों का भला हो सके, लेकिन इतनी पवित्र बात पूर्ण रूप से किसानों के हित की बात हम कुछ किसानों को समझा नहीं पाए, शायद हमारी तपस्या में कहीं कमी रह गई। भले ही किसानों का एक वर्ग इसका विरोध कर रहा था। हमने बातचीत का प्रयास किया, ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। जिसके बाद हमने कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया। 

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