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प्रख्यात कवि और चित्रकार विजेंद्र का कोरोना से हुआ निधन
Fri, 30 Apr 2021 07:53 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 30 Apr 2021 07:53 AM IST
सार
- बदायूं के मूल निवासी विजेंद्र ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पढ़ाई के बाद लंबे अरसे तक राजस्थान के कॉलेजों में अध्ययन किया
- प्रखर चिंतक, आलोचक और चित्रकार विजेंद्र की मार्क्सवादी सौंदर्यशास्त्र पर गहरी पकड़ थी
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कवि विजेंद्र
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विस्तार
प्रगतिशील धार के प्रमुख कवि विजेंद्र को भी गुरुवार को क्रूर कोरोना ने लील लिया। संक्रमण के बीच सुबह उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत हुई थी लेकिन व्यवस्था नहीं हो सकी। एक दिन पहले ही उनकी सहधर्मिणी उषा भी नहीं रही थीं।
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प्रखर चिंतक, आलोचक और चित्रकार विजेंद्र की मार्क्सवादी सौंदर्यशास्त्र पर गहरी पकड़ रही। बदायूं के मूल निवासी विजेंद्र ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पढ़ाई के बाद लंबे अरसे तक राजस्थान के कॉलेजों में अध्ययन किया। फिर गुरुग्राम में रहने लगे।
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उनके नियमित डायरी लेखन में समकालीन समाज और संस्कृति पर गहरी टिप्पणियां हैं, जो बाद में उनकी पुस्तकों मे दर्ज हुई। कवि की अंतर्यात्रा उनकी पहली किताब थी। इसके बाद बीस कविता संग्रह और कई नाटक भी प्रकाशित हुए। चैत की लाल टहनी, उठे गूमड़ नीले और ऋतु का पहला फूल उनके चर्चित संग्रह हैं। विजेंद्र ने बरसों तक कृति और नामक साहित्यिक पत्रिका का भी संपादन-प्रकाशन किया।
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