सरिस्का टाइगर रिजर्व: रमेश बोले- सफलता की कहानी साबित हुआ बाघों का स्थानांतरण, 2014 से बहुत पहले हुई थी शुरुआत
Sariska Tiger Reserve: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 15 साल पहले सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या घटकर शून्य हो गई थी, लेकिन रणथंभौर और अन्य जगहों से बाघों का उस रिजर्व में स्थानांतरण एक उल्लेखनीय सफलता की कहानी साबित हुआ।
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पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि 15 साल पहले सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या घटकर शून्य हो गई थी, लेकिन रणथंभौर और अन्य जगहों से बाघों का उस रिजर्व में स्थानांतरण एक उल्लेखनीय सफलता की कहानी साबित हुआ, जो 2014 से बहुत पहले शुरू हुई थी।
उनकी यह टिप्पणी मीडिया में आई उस खबर को लेकर आई है जिसमें कहा गया है कि दो शावकों के जन्म के साथ ही सरिस्का में बाघों की संख्या तीन दशक में सर्वाधिक 30 हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, शावकों का जन्म एसटी-19 से हुआ था और तीनों को 6 जुलाई को अलवर के पास पार्क के बफर जोन में कैमरे में कैद किया गया था।
'सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों हो गया था सफाया'
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रिपोर्ट को टैग करते हुए कहा, 'सिर्फ 15 साल पहले विशाल सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी का पूरी तरह से सफाया हो गया था। यह बिल्कुल शून्य हो गया था।' उन्होंने कहा कि सरिस्का को पुनर्जीवित करने के लिए पुनर्वास पर विचार किया गया था, लेकिन इसे कुछ बाघ विशेषज्ञों सहित बड़े विरोध का सामना करना पड़ा।
'2014 से पहले शुरू हुई थी सफलता की कहानी'
उन्होंने कहा, 'हालांकि, रणथंभौर और अन्य जगहों से स्थानांतरण शुरू हुआ और आज सरिस्का में 30 बाघ हैं जिनकी वहन क्षमता कम से कम 40 है। मई 2009 से जुलाई 2011 तक पर्यावरण और वन मंत्रालय का नेतृत्व करने वाले रमेश ने कहा, 'यह एक उल्लेखनीय सफलता की कहानी है जो 2014 से बहुत पहले शुरू हुई थी।'